सोनीपत। बढ़ते वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हवा को स्वच्छ बनाने की दिशा में सोनीपत जिला प्रशासन ने सख्त निर्णय लिया है। जिले की सड़कों पर दौड़ रहे डीजल ऑटो अब इतिहास बनने जा रहे हैं। जिला परिवहन अधिकारी एवं सचिव, प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण सुभाष चंद्र ने ऑटो मालिकों व यूनियन प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर स्पष्ट कर दिया है कि 1 जनवरी से किसी भी डीजल ऑटो को चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
शहर की परिवहन व्यवस्था और हजारों ऑटो चालकों पर इस फैसले का सीधा असर पड़ेगा। प्रशासन ने डीजल ऑटो हटाने के लिए 31 दिसंबर तक की समय सीमा तय की है। इस दौरान चरणबद्ध तरीके से डीजल ऑटो को सड़कों से हटाया जाएगा ताकि यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो और यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न उठानी पड़े।
प्रशासन ने यह निर्णय कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) के निर्देश संख्या-70 के तहत लिया है। अधिकारियों के अनुसार एनसीआर के अन्य जिलों की तरह सोनीपत में भी वायु प्रदूषण का स्तर कई बार चिंताजनक श्रेणी में पहुंच जाता है।
डीजल ऑटो से निकलने वाला धुआं स्थानीय प्रदूषण का बड़ा कारण है। इसे नियंत्रित करने के लिए स्वच्छ ईंधन आधारित परिवहन को बढ़ावा देना अब जरूरी हो गया है।
ऑटो चालकों के साथ हुई विस्तृत चर्चा
इसे लेकर एसडीएम ने ऑटो यूनियन के प्रधान इंद्रजीत, चालकों और पदाधिकारियों से विस्तृत चर्चा की। इस दौरान राजकुमार, सतीश कुमार, आनंद कुमार, प्रेम सिंह, दिनेश, रोहताश, प्रताप सिंह और संजय व अन्य ऑटो चालक मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से चालकों को सलाह दी गई कि वह समय रहते अपने डीजल ऑटो को इलेक्ट्रिक या सीएनजी विकल्पों में परिवर्तित करें। चालकों ने कुछ व्यावहारिक समस्याएं भी सामने रखीं लेकिन एसडीएम सुभाष चंद्र ने दो टूक कहा कि पर्यावरणीय नियमों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। डीजल वाहनों का संचालन अब संभव नहीं होगा।
कार्बन उत्सर्जन में होगी कमी
प्रशासन का मानना है कि डीजल ऑटो हटने से न केवल कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी बल्कि शहर में ध्वनि प्रदूषण भी घटेगा। यह कदम बड़ा बदलाव साबित होगा। आने वाले समय में प्रशासन अन्य श्रेणियों के पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर भी सख्त निगरानी बढ़ाने की योजना बना रहा है। 31 दिसंबर के बाद यदि कोई डीजल ऑटो सड़कों पर पाया गया तो उसे जब्त करने के साथ भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।