गन्नौर। कार्तिक पूर्णिमा और देव दिवाली पर शुक्रवार को सिद्धपीठ तीर्थ सतकुंभा धाम में मेला लगाया गया। मेले में हरियाणा के विभिन्न जिलों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर के कुंड में श्रद्धा की डुबकी लगाई। मेले में बच्चों व महिलाओं ने खूब खरीदारी की। मंदिर में लगे भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। साथ ही कई श्रद्धालुओं ने यमुना नदी पर पहुंचकर स्नान किया और पूजा-अर्चना की।
कार्तिक पूर्णिमा पर सुबह से ही सतकुंभा धाम व यमुना नदी पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। यहां श्रद्धालुओं ने जहां आस्था की डुबकी लगाई, वहीं पूजा-अर्चना कर मन्नतें मांगी। मंदिर परिसर में लगे मेले में श्रद्धालुओं ने जमकर खरीदारी भी की। कार्तिक पूर्णिमा पर मंदिर को सजाया गया। महंत राजेश स्वरूप महाराज ने कहा कि सतकुंभा धाम तीर्थ स्थलों में शामिल है, यहां के कुंड में किया गया स्नान गंगा, यमुना के स्नान के बराबर माना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के साथ आज गुरु पर्व भी है। इस दिन सभी देवी देवता अपना सानिध्य देने के लिए अवतरित होते हैं और श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करते हैं, इसलिए इस स्नान का महत्व ज्यादा है।
पितृ पक्ष सुख-समृद्धि व खुशहाली का देते हैं आशीर्वाद
महंत राजेश स्वरूप महाराज ने कहा कि कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि को देव दिवाली कहा जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान व दान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि पूर्णिमा तिथि के दिन भगवान शिव ने देवताओं के लिए त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का संहार किया था। दीपोत्सव के 15 दिन बाद देव दिवाली पर पितृ पक्ष सुख समृद्धि व खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव, विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष प्रावधान है। पूजा-अर्चना से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
1000 कन्याओं को कराया भोज
कार्तिक स्नान करने के लिए धाम में आसपास के गांवों सहित हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, चंडीगढ, दिल्ली से भी श्रद्धालु पहुंचे। राजेश स्वरूप महाराज ने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा पर 1000 कन्याओं को भोज करवाकर श्रद्धालुओं ने भंडारा लगाया। कार्तिक पूर्णिमा पर अन्न-धन के दान का भी बड़ा महत्व माना गया है। युवा श्रद्धालुओं ने भंडारे में सेवा करके पुण्य कमाया।