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डीसी-एसपी की मशक्कत के बावजूद नहीं सुलझा विवाद, 20 जून को महापंचायत में फैसला लेंगे ग्रामीण

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सेरसा के पूर्व पंच पर हमला करने व किसान आंदोलन के कारण रास्ते बंद होने के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ती जा रही है और इससे विवाद भी शुरू हो गया है। इस तरह स्थानीय ग्रामीणों व आंदोलनरत किसानों को आमने-सामने आते देखकर विवाद निपटाने के लिए राई के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में मंगलवार को बैठक रखी गई।
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बैठक में डीसी व एसपी के डेढ़ घंटे की जद्दोजहद के बावजूद विवाद नहीं सुलझ सका और अब ग्रामीण 20 जून को महापंचायत करके आगे के लिए फैसला लेंगे। वहीं इस बैठक में डीसी ने सभी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया तो एसपी ने कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कही।
कृषि कानून रद्द कराने की मांग के लिए कुंडली बॉर्डर पर किसानों का धरना चल रहा है। आंदोलन में शामिल किसानों ने जांटी रोड बंद की हुई है, जिसका विरोध करने पर किसानों ने सेरसा गांव के पूर्व पंच रामनिवास पर हमला कर दिया था। इस हमले के बाद आसपास के ग्रामीण भी किसानों के खिलाफ एकजुट हो गए हैं। इसको लेकर सोमवार को गांव सेरसा में 14 गांवों के प्रतिनिधियों की पंचायत हुई थी और इस तरह से स्थानीय ग्रामीणों व आंदोलन कर रहे किसानों के बीच विवाद बढ़ता दिख रहा है। ग्रामीणों व किसानों के साथ बातचीत करके विवाद सुलझाने के लिए पुलिस व प्रशासन ने एक बैठक बुलाई। राई के रेस्ट हाउस में हुई बैठक में डीसी ललित सिवाच, एसपी जश्नदीप रंधावा, एसडीएम शशि वसुंधरा, डीएसपी विपिन कादियान, विरेंद्र राव पहुंचे तो अटेरना से राजपूत सभा के चरण सिंह चौहान, दीपक चौहान, दहिसरा से पूर्व सरपंच मांगेराम, मनौली से ताहर सिंह, भैरा बांकीपुर से मास्टर सतीश चौहान, जयराम शर्मा, सेरसा गांव की निवर्तमान सरपंच नीलम के पति मोनू प्रधान, जांटी कलां के निवर्तमान सरपंच जसबीर सिंह रहे। इनके अलावा संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से दर्शनपाल, पवन कुमार, बलवंत सिंह, सतनाम सिंह, करतार सिंह, हरमेंद्र सिंह, अभिमन्यु कोहाड़ आदि बैठक में शामिल होने पहुंचे। ग्रामीणों ने कहा कि जिस तरह से उन पर हमले किए जा रहे हैं और रास्तों को बंद किया गया है, वह पूरी तरह से गलत है। आंदोलन की आड़ में हिंसा नहीं होनी चाहिए। कुंडली गांव में तो सरेआम झगड़े किए जा रहे हैं और इस तरह से माहौल बिगाड़ा जा रहा है। वहां डीसी ललित सिवाच ने कहा कि बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए और हिंसात्मक घटना निंदनीय है। डीसी ने कहा कि यदि आंदोलन में कोई संदिग्ध दिखाई दे तो उसकी सूचना पुलिस प्रशासन को दी जाए। किसान नेताओं ने आंदोलन स्थल पर बिजली व सफाई की व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ ही फॉगिंग कराने की मांग रखी। डीसी ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को सभी व्यवस्थाओं को बेहतरीन करने व सर्विस रोड की मरम्मत का कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। एसपी जश्नदीप रंधावा ने कहा कि सभी को कानून व्यवस्था बनाकर रखनी है और उसको लेकर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी मिलकर कानून व्यवस्था को बेहतर रख सकते हैं और जिस तरह से अभी तक शांति रही है, उसी तरह आगे भी रखनी चाहिए।
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ग्रामीणों ने की एक तरफ का रास्ता खोलने की मांग
स्थानीय ग्रामीणों ने आंदोलनकारी किसान नेताओं से काम-काज व आवाजाही के लिए एक तरफ का रास्ता खोलने की मांग की। इसके साथ ही हिंसात्मक घटनाओं पर रोक लगाने की बात कही गई। जिस पर कोई सहमति नहीं बन सकी और डीसी व एसपी ने ग्रामीणों से अलग से बात करके किसान नेताओं के बीच में रखने का आश्वासन दिया। इस बैठक के बाद बाहर आए स्थानीय ग्रामीणों ने साफ कहा कि अधिकारी किसी तरह से समस्या का समाधान नहीं निकलवा सके और अब जांटी कला की व्यायामशाला में 20 जून को 14 गांवों की महापंचायत बुलाई गई है। इस तरह करीब डेढ़ घंटे की जद्दोजहद के बाद भी डीसी ललित सिवाच व एसपी जश्नदीप रंधावा विवाद को नहीं सुलझवा सके और उसके बाद भी ग्रामीण पंचायत करने पर अड़े हुए हैं।
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