एक तरफ स्वास्थ्य विभाग डेंगू को लेकर लीपापोती में जुटा हुआ है, दूसरी तरफ मौत का सिलसिला जारी है। सोमवार को जहां नाथूपुर की 20 वर्षीय युवती दीक्षिता ने दिल्ली के एक निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया, वहीं देर शाम खटकड़ गांव के एक दुकानदार विनोद की राई के एक निजी अस्पताल में मौत हो गई।
विभाग जहां दोनों को डेंगू पीड़ित मानने को अभी तैयार नहीं है, दूसरी तरफ परिजन डेंगू के चलते मौत बता रहे हैं। कुछ भी हो, जिलें डेंगू के चलते सरकारी व गैर सरकारी रिकार्ड में मरने वालों की संख्या 14 के पार पहुंच गई है।
पहला केस
नाथपुर निवासी 20 वर्षीय दीक्षिता एक सप्ताह से बीमार चल ही थी। पहले तो परिजनों ने मामूली बुखार माना, लेकिन चार दिन पहले तबीयत ज्यादा खराब हो गई। इसके चलते परिजनों ने उसे दिल्ली के एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया, जहां सोमवार को उसकी मौत हो गई। मौत से परिवार में मातम का माहौल है।
दूसरा केस
खटकड़ गांव निवासी टीकाराम ने बताया कि उनके भतीजे विनोद को दो से तीन दिन पहले बुखार से पीड़ित था, जिसके चलते उसे बहालगढ़ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी देर शाम को मौत हो गई। प्रशासन से बार बार गुहार लगाने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है और सूचना के बाद भी फागिंग नहीं करवाई जा रही है अब भी गांव में सोनाक्षी, राकेश, आशु और जसवंत सहित आधा दर्जन लोग बुखार से पीड़ित हैं। उधर, विभाग विनोद की मौत को बिना रिपोर्ट डेंगू से मानने से इंकार कर रहा है।
सरपंच बोला, विभाग टरका रहा
खटकड़ गांव के सरपंच अमर सिंह ने बताया कि एक सप्ताह पहले गांव में फैलते डेंगू और दूसरे बुखार को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग से फागिंग कराने की मांग की थी, लेकिन विभाग की तरफ से जवाब था कि उनके पास फागिंग मशीन नहीं है जैसे ही मशीन मिलती है वो फागिंग जरूर करवाएंगे
एक माह में 12 मौत, जिम्मेदारी से नहीं बच सकता स्वास्थ्य विभाग
गांव बेगा में एक माह के अंदर हुई 12 मौतों को भले ही स्वास्थ्य विभाग डेंगू मानने से इंकार कर रही है, लेकिन सवाल उठ रहा है कि डेंगू के मौसम में एक ही गांव से हुई 12 लोगों के मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है। स्वास्थ्य विभाग भले ही इन मौतों को लेकर अपना पल्ला झाड़ रही है, लेकिन सामान्य अस्पताल में डेंगू के इलाज को लेकर हकीकत कुछ और है। इस मौसम में डेंगू बुखार से पीड़ित मरीजों में अचानक ही प्लेट्लेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है, लेकिन अस्पताल में इस तरह की कोई सुविधा न होने से मरीजों को पीजीआई खानपुर या फिर पीजीआई रोहतक की दौड़ लगानी पड़ रही है जबकि डेंगू प्रभावित मरीजों में प्लेटलेट्स चढ़ाना किसी भी मरीज के लिए सबसे अधिक जरूरी है। इधर राई ब्लॉक में दो और लोगों की बुखार से मौत हो गई है। इन दोनों में डेंगू के संदिग्ध लक्षण बताए जा रहे हैं।
सामान्य अस्पताल से प्रतिदिन 8 से 10 मरीज हो रहे रेफर
सामान्य अस्पताल के डेंगू वार्ड में सिर्फ उन्हें ही भर्ती किया जाता है, जिनकी प्लेटलेट्स की संख्या एक लाख से ऊपर है। जैसे ही इन मरीजों में प्लेटलेट्स की संख्या में कमी आती दिखती है, तो इन्हें पीजीआई खानपुर या फिर रोहतक रेफर कर दिया जाता है। इसके अलावा डेंगू बुखार से पीड़ित गंभीर मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, लेकिन जांच में प्लेटलेट्स कम मिलने पर उसे सीधे रेफर कर दिया जाता है। सामान्य अस्पताल के कमरा नंबर -57 में मरीजों के प्लेटलेट्स की जांच की जाती है।
सीधी बात
प्रश्न-जिले में अब तक डेंगू के कुल कितने केस आ चुके है?
उत्तर-डेंगू से जिले में अब तक एक की मौत की पुष्टि हुई है।
प्रश्न-एक ही माह में गांव बेगा में 12 लोगों की मौत हो चुकी है। इसकी क्या वजह है?
उत्तर-सभी मौतों की वजह अलग-अलग है। इनमें तीन लोगों में सांस संबंधित बीमारियां थी जबकि तीन में हृदय संबंधित समस्याएं थी। इसके अलावा कैंसर सहित अन्य बीमारी से भी मरीज ग्रसित थे।
प्रश्न-लोगों का सवाल है कि यदि स्वास्थ्य विभाग समय से पहले सचेत रहता तो इस तरह की नौबत नहीं आती?
उत्तर-ग्रामीणों को जागरूक होना होगा। जमा पानी की वजह से मच्छर पनप रहे हैं। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को सहयोग करने के लिए लोगों को भी आगे आना होगा।
प्रश्न-सामान्य अस्पातल में प्लेटलेट्स की सुविधा नहीं है। उन्हें कहां रेफर किया जा रहा है?
उत्तर-प्लेटलेट्स चढ़ाने के लिए सभी मरीजों को पीजीआई खानपुर के लिए रेफर किया जाता है जहां सभी तरह की अत्याधुनिक सुविधाएं है।
सांसद ने किया गांव बेगा का दौरा
सांसद रमेश कौशिक ने सोमवार को गांव बेगा का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर भी निरीक्षण किया। वहां के शौचालयों, टंकियों और कमरों को बारीकी से देखा। इस दौरान उन्होंने कहा कि डेंगू और अन्य बुखार पीड़ितों को बेहतर सुविधा के लिए मेडिकल कालेज खानपुर में अलग वार्ड स्थापित किया गया है। बाद में पूरे गांव का दौरा किया और बुखार पीड़ित मरीजों से रूबरू हुए। इस दौरान सांसद ने ग्रामीणों से अपील की कि वे सफाई का विशेष ध्यान रखें और पानी का जमावड़ा नहीं होने दें।
उन्होंने कहा कि फॉगिंग मशीन पीएचसी में ही रखवा दी गई है, ग्रामीण जब चाहे फॉगिंग करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे एक कमेटी का गठन कर सकते हैं ताकि पूरे गांव में फिर से फॉगिंग कराई जा सके। इस मौके पर उपमंडल अधिकारी (ना.) मनीषा शर्मा ने कहा कि गांव में सफाई व्यवस्था के पर्याप्त इंतजाम किये गये हैं।
गांव में फैले बुखार और गंदगी से निपटने के लिए ग्रामीणों की एक टीम का गठन हुआ। यह कमेटी बीडीपीओ पूनम चंदा की देखरेख में गांव की सफाई व्यवस्था पर निगरानी रखेगी और ग्रामीणों को अपने घर के आसपास सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए जागरूक करेगी।