संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी), मुरथल में मंगलवार को कर्मचारियों, शिक्षकों, हॉस्टल वर्करों और छात्र-छात्राओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
दीनबंधु छोटू राम कर्मचारी यूनियन के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण पैदल मार्च निकालते हुए कुलपति कार्यालय का घेराव किया और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि 3 जून को ही विश्वविद्यालय प्रशासन को मांगपत्र और वार्ता का अनुरोध सौंप दिया गया था लेकिन अब तक कोई बैठक नहीं बुलाई गई। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की उदासीनता और संवादहीनता के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने के लिए कुलपति से मिलने पहुंचे लेकिन उनके कार्यालय में मौजूद नहीं होने के कारण ज्ञापन रजिस्ट्रार को सौंप दिया गया। ज्ञापन में कर्मचारियों, शिक्षकों और अन्य वर्गों से जुड़े विभिन्न लंबित मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।
तीन साल से लंबित पदोन्नति और वेतन निर्धारण का मुद्दा गरमाया
यूनियन ने ज्ञापन में तीन वर्षों से लंबित पदोन्नति और पे-फिक्सेशन के मामलों को शीघ्र निपटाने की मांग की। इसके अलावा हरियाणा सरकार की एसईटीसी हिदायतों को लागू करने, कच्चे कर्मचारियों के लिए नौकरी सुरक्षा नियमों को प्रभावी बनाने, एचकेआरएनएल कर्मचारियों के बकाया वेतन का भुगतान, समय पर वेतन जारी करने, सेवा विस्तार और अनुभव आधारित वेतन वृद्धि की मांग भी रखी गई। कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग दोहराते हुए कहा कि यह व्यवस्था प्रदेश के अन्य संस्थानों की तर्ज पर यहां भी लागू की जानी चाहिए।
विश्वविद्यालय की आधारभूत सुविधाओं पर भी उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान छात्रावासों, सड़कों और विश्वविद्यालय भवनों की जर्जर होती स्थिति को लेकर भी नाराजगी व्यक्त की गई। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत डीन, चेयरपर्सन, ईसी और एसी सदस्यों की नियुक्तियां नहीं किए जाने का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप था कि नियमानुसार पात्र होने के बावजूद प्रो. मनोज कुमार दूहन को डीन, फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एफईटी) का पद नहीं दिया गया। इसके विरोध में प्रो. दुहन ने प्रतिदिन एक घंटे की सांकेतिक हड़ताल शुरू कर दी है।
कुलपति पर नियमों की अनदेखी का आरोप
यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति सरकार के नियमों एवं निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं। यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।