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Sonipat News: जनगणना 2027 की तैयारियों की डीसी ने की समीक्षा, 01 मई से शुरू होगा पहला चरण

Tue, 21 Apr 2026 03:58 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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सोनीपत। जनगणना 2027 के सुचारू संचालन को लेकर उपायुक्त सह प्रिंसिपल जनगणना अधिकारी नेहा सिंह ने सोमवार को जनगणना के प्रभारी अधिकारी व सभी संबंधित अधिकारियों की बैठक ली। इसमें अब तक किए गए कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक के दौरान प्रभारी अधिकारियों की ओर से स्टाफ की कमी का मुद्दा उपायुक्त के समक्ष रखा गया।
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उपायुक्त ने जनगणना समन्वयक अधिकारी गौरव कुमार को निर्देश दिए कि वह जिला शिक्षा अधिकारी के साथ समन्वय स्थापित कर सभी प्रभारी अधिकारियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करें।
उन्होंने डीआईओ को भी निर्देशित किया कि जिन अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी जनगणना के फील्ड ट्रेनर्स के रूप में लगी हुई है उनकी ड्यूटी नगर निगम चुनाव में न लगाई जाएं इससे जनगणना कार्य प्रभावित न हो।
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उपायुक्त ने बताया कि वर्तमान में जनगणना प्रशिक्षण का कार्य जारी है और आज से चौथे बैच की शुरुआत हुई है। यह प्रशिक्षण बैच 20 से 22 अप्रैल तक चलेगा जिसमें सभी गणनाकर्ताओं और सुपरवाइजर्स को 1 मई से शुरू होने वाले प्रथम चरण के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
उपायुक्त बताया कि 16 अप्रैल से शुरू हुए स्वःगणना पोर्टल https://se.census.gov.in पर सभी जिसावासी पूछे गए सवालों को सटीक जवाब दे। स्वःगणना को शुरू करने के बाद उसे पूरा करें। उन्होंने बताया कि 30 अप्रैल तक जिलेवासी पोर्टल पर स्वःगणना कर सकते हैं।
1 मई से 30 मई तक जनगणना के प्रथम चरण को आयोजन किया जाएगा व 9 फरवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक जनगणना के दूसरे चरण का आयोजन होगा।
इस दौरान संयुक्त आयुक्त मीतू धनखड़, नगराधीश सिमरन, जिला राजस्व अधिकारी सुशील शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी नवीन गुलिया, तहसीलदार कीर्ति, ललिता, जिला जनगणना समन्वयक अधिकारी गौरव कुमार भी मौजूद रहे।
लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस
उपायुक्त नेहा सिंह ने बताया कि जनगणना कार्य के लिए नियुक्त कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों (एन्यूमरेटर, सुपरवाइजर, चार्ज अधिकारी) की ओर से अनिवार्य प्रशिक्षण सत्रों में भाग नहीं लिया गया। उन्हें सौंपे गए जनगणना कार्यों के निष्पादन में लापरवाही बरती गई है। जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 के अनुसार आदेशों की अवहेलना दंडनीय अपराध है।
उपायुक्त ने अनुपस्थित एवं कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियाें को निर्देश दिए कि वह इस के नोटिस जारी होने के 24 घंटे के भीतर अपने संबंधित चार्ज अधिकारियों व तहसीलदार के समक्ष उपस्थित होकर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें।

वैधानिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई के प्रावधान
- कार्य से इंकार, लापरवाही : जनगणना कार्य करने से मना करने या लापरवाही बरतने पर संबंधित व्यक्ति को 3 वर्ष तक का कारावास अथवा जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
- आदेशों की अवहेलना : जनगणना कार्य में बाधा डालने या आदेशों का पालन न करने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
- आर्थिक दंड : प्रत्येक लापरवाही या इनकार के लिए 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
- विभागीय कार्रवाई : संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई (मेजर पेनल्टी) शुरू की जाएगी तथा उनकी सेवा पुस्तिका में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की जाएगी।
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