हरियाणा में सोनीपत एसटीएफ ने अब पेपर सॉल्वर गैंग में शामिल कोचिंग सेंटर संचालकों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसमें गोहाना में दो-दो कोचिंग सेंटर चला रहे सिकंदरपुर माजरा के सुनील को गिरफ्तार कर लिया है। अब पुलिस उससे अन्य कोचिंग सेंटर संचालकों का पता लगाने का प्रयास करेगी। इस मामले में अब तक करीब आठ कोचिंग सेंटर संचालकों के नाम सामने आए हैं।
पानीपत में दर्ज पेपर लीक मामले में कोचिंग सेंटर संचालक सुनील को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी ने एसटीएफ से शुरुआती पूछताछ में बताया कि वह कई साल से रोबिन व उसके गैंग के अन्य सदस्यों से जुड़ गया था। गैंग के सदस्य उससे अभ्यर्थी का नाम, पता व मोबाइल नंबर लेते थे। साथ ही कई अभ्यर्थियों से बातचीत का वह स्वयं भी उन्हें गैंग के माध्यम से पेपर पास कराने को तैयार करता था।
उसका खुद का कोचिंग सेंटर चलाता था। ऐसे में वह कोचिंग के दौरान अभ्यर्थी के फार्म खुद ही भर देता था। वह उन्हें लालच देता था कि वह उनके पेपर पास कराकर नौकरी लगवा देगा। जिसके चलते कई युवा इसके लिए तैयार हो जाते थे। वह उन्हें गैंग से मिलवाता था।
ऐसे में नौकरी के अनुसार उसे कमीशन दिया जाता था। साथ ही उससे जुड़े कई युवाओं की नौकरी लगने के बाद उससे काफी युवा संपर्क करने लगे थे। गैंग को अधिक से अधिक अभ्यर्थियों की जरूरत थी। जिससे उनके साथ उसका धंधा भी अच्छा चल निकला।
गैंग के लिए अभ्यर्थी देने का साफ्ट टारगेट बने कोचिंग सेंटर
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि आरोपी कोचिंग सेंटर संचालकों से मिलकर अभ्यर्थियों का पता लगाते थे। कोचिंग सेंटर संचालक उन्हें कोचिंग लेने वाले विद्यार्थियों का डाटा देते थे। जिसके बाद वह उनसे संपर्क करते थे। उनसे संपर्क करने के बाद पता लगाया जाता था कि उन्होंने किस नौकरी के लिए फार्म भरा है। कई के फार्म खुद कोचिंग सेंटर संचालक भर देते हैं। ऐसे में उनसे पेपर पास कराने के नाम पर सौदा किया जाता था। करीब आठ कोचिंग सेंटर के नाम एसटीएफ के सामने आ चुके हैं। अन्य के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
आठ लाख में नौकरी पाने के बाद और को लगवाने लगा नौकरी
एसटीएफ के अनुसार उनके हत्थे चढ़े मंजीत ने पहले गैंग से जुड़कर वर्ष 2018 में रेलवे में नौकरी पाई थी। उसने इसके लिए आठ लाख रुपये दिए थे। बाद में वह गैंग के लिए अभ्यर्थी लेकर आने लगा। इसके लिए पांच लाख रुपये तक लेता था। वह रेलवे में नौकरी करता था। ऐसे में उसे कई युवा मिल जाते थे। जिनसे वह पेपर पास कराने का सौदा करता था।