हरियाणा के सोनीपत जिले के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र सिंह की अदालत ने युवती को आत्महत्या के लिए विवश करने के मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी को पांच साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर 25 हजार रुपये जुर्माना किया गया है। जुर्माना राशि पीड़िता के परिजनों को देने के आदेश दिए गए हैं।
गांव लुहारी टिब्बा की 19 वर्षीय युवती ने 27 जून, 2016 को सदर थाना पुलिस को बताया था कि उनके घर के बाहर बरगद का पेड़ था। इस पर उनके साथ ही आसपास के लोगों के बिजली के तार बंधे थे। गांव के करतार ने बरगद के पेड़ को काटने को कहा था, जिस पर उसने करतार को बिजली के तार बचाकर पेड़ काटने को कहा था।
इस पर करतार ने तार को तोड़ने की धमकी दी थी। इसी बात को करतार व उसके परिजनों ने उसे, उसकी मां व पिता से मारपीट की थी। बाद में वह डरकर अपने घर चले गए थे। इस पर आरोपियों ने उनके घर के अंदर आकर मारपीट की थी। साथ ही करतार ने उसे धमकी दी थी।
इससे डरकर उसने जहर खा लिया था। युवती ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस ने युवती के बयान पर मुकदमा दर्ज कर लिया था। 28 जून, 2016 को खानपुर मेडिकल कॉलेज में युवती की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। पुलिस ने आत्महत्या के लिए विवश करने की धारा भी जोड़ दी थी। पुलिस ने मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
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जुर्माना राशि जमा पीड़िता के परिजनों को देने के आदेश
मामले की सुनवाई करते हुए एएसजे शैलेंद्र सिंह की अदालत ने मंगलवार को करतार को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी को पांच साल कैद व 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर छह माह अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी होगी। जुर्माना राशि जमा कराने की स्थिति में उसे पीड़िता के परिजनों को देने के आदेश दिए गए हैं।