चार साल पहले खरखौदा के प्रदीप से इंटरकास्ट मैरिज करने वाली सुशीला की पीठ में गोली लगी थी। पति, सास व ससुर की हत्या हो चुकी थी। ऐसे हालात में भी सुशीला ने हिम्मत नहीं हारी और प्रसव पीड़ा सहन करते हुए बेटे को जन्म दिया। बेटा पूरी तरह स्वस्थ है। हालांकि, खुद सुशीला की हालत अब भी खतरे से बाहर नहीं है। वारदात में सलामत रही तीन साल की बेटी प्रिया को पता नहीं कि उसके पिता, दादा व दादी अब इस दुनिया में नहीं हैं। साथ ही मां व चाचा पीजीआई रोहतक में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
परिजनों ने बताया कि प्रदीप का परिवार मूलरूप से जसौरखेड़ी (बहादुरगढ-झज्जर) के रहने वाला हैं। करीब बीस वर्ष पहले खरखौदा में आकर बस गया। परिवार में पिता सुरेश, माता सुनीता, पत्नी सुशीला, छोटा भाई सूरज, बहन ललीता और तीन साल की बेटी प्रिया के साथ रह रहा था। प्रदीप ने चार वर्ष पहले ही बिधराणा-झज्जर की रहने वाली सुशीला से अंतर जातीय विवाह किया था। दोनों एमडीयू रोहतक में पढ़ते थे। इसके बाद उसके परिजनों ने उससे रिश्ता तोड़ लिया था। सुशीला ने प्रिया को जन्म दिया था। उनकी जिंदगी हंसी-खुशी गुजरने लगी। इसी बीच सुशीला के भाई का भी उनके घर आना जाना या फिर बाहर मिलना-जुलना शुरू हो गया। लेकिन शादी के चार साल बाद ऐसी वारदात हुई, जिसकी आशंका परिजनों को भी नहीं थी।
नहीं थी किसी से दुश्मनी
वार्ड-9 निवासियों व जिन लोगों के साथ इस परिवार से संबंध है, उन सभी ने एक ही बात कही कि इस परिवार का किसी के साथ कोई झगड़ा व दुश्मनी नहीं हो सकती, क्योंकि यह परिवार सादगी भरा जीवन व्यतीत कर रहे थे। सुरेश लकड़ी का काम करता था और प्रदीप सैदपुर में एक फैक्टरी में काम कर अपना गुजर-बसर कर रहे थे। ऐसे में उनके साथ इतनी बड़ी वारदात से वह सकते में हैं।
एक साथ जली मां ,बाप और बेटे की चिता
एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या की वारदात का जिस भी व्यक्ति को पता लगा, वह वार्ड-9 की उस गली की तरफ दौड़ पड़ा कि आखिर हुआ क्या। जिस समय स्वार्गधाम में तीनों चिताओं को मुखाग्नि दी गई, वहां मौजूद व्यक्तियों की आंखें नम हो गईं। रह-रहकर सबके दिल में सवाल उठ रहा था कि अब तीन साल की बच्ची और घर में आए नए मेहमान का सहारा कौन बनेगा।
बच गई बहन व बेटी
प्रदीप की छोटी बहन ललिता पढ़ाई कर अपने ताऊ ओम प्रकाश के घर में ही सोती थी। इसी कारण वह हमलावरों के निशाने से बच गई। वहीं, प्रदीप की तीन साल की बेटी प्रिया वारदात के समय अपने माता-पिता के ही साथ थी। घटना के बाद जब पड़ोसी वहां पहुंचे तो वह बेड पर खड़ी रो जरूर रही थी, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि आखिर क्या हुआ है। सुबह वह अन्य बच्चों की तरह घर के सामने घूम रही थी।
कुछ समय से सुशीला का भाई उसके पास आने लगा था। वारदात के पीछे उसके परिजनों का हाथ होने की पूरी संभावना है। हालांकि गिरफ्तारी के बाद पक्के तौर पर कहा जा सकेगा। पुलिस की टीमें छापामारी कर रही हैं। दो टीमें सुशीला के मायकों से पूछताछ करने के लिए झज्जर रवाना हो गई हैं।
अश्विन शैणवी, पुलिस अधीक्षक