शहर के सेक्टर-7 में बनी आलीशान कोठी असामाजिक तत्वों के लिए शरण स्थली बनती जा रही है। शुक्रवार रात को मुठभेड़ के बाद दबोचे गए दो कुख्यात बदमाश मोनू जाट व नितिन राठी तीन दिन से इस कोठी में रह रहे थे। पुलिस पहले भी यहां से असामाजिक तत्वों को दबोच चुकी है। कोठी का मालिक कौन है, कभी सामने क्यों नहीं आता, इससे पुलिस परेशान है। पुलिस ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) को पत्र लिखकर कोठी की मलकियत का रिकार्ड मांगा है।
पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए बदमाशों ने पूछताछ में बताया कि कोठी के बारे में उनके संपर्क में रहे यूपी के हार्डकोर क्रिमिनल ने बताया था। यूपी में लगातार वारदातों के बाद पुलिस की एक पूरी कंपनी उनके पीछे पड़ गई। यहां तक 50-50 हजार का इनाम घोषित कर दिया। ऐसे में रातों-रात बार्डर पार कर 28 सितंबर को सोनीपत पहुंचे और कोठी में शरण ले ली। दिन में नजदीक पार्क में घूमने के बाद पेड़ के नीचे सो जाते। अंधेरा होने पर मुरथल के ढाबों में खाना खाकर लौट आते। आने के बाद कोठी के अंदर जाते। तीन मंजिला कोठी के दरवाजे व खिड़कियां टूटी चुकी हैं।
इनामी बदमाश जमाए हुए थे डेरा, पुलिस अनजान
किसी ने पुलिस को केवल इतनी सूचना दी थी कि कोठी में कुछ संदिग्ध युवक रह रहे हैं। यह पता नहीं था कि ये 15 दिन में 5 मर्डर करके यूपी से फरार हुए इनामी बदमाश मोनू व नितिन हैं। पुलिस जिस समय पुख्ता सूचना पाकर कोठी के पास पहुंची, उस समय मोमबत्ती जल ही थी। इससे पुलिस को पक्का यकीन हो गया कि कोई अंदर मौजूद है। इसलिए कोठी को चारों तरफ से घेर लिया, क्योंकि कोठी से बाहर निकलने के लिए तीन दिशाओं में रास्ता है। मुठभेड़ में जब आमने-सामने की फायरिंग हुई, तब नितिन दीवार फांद कर खेतों में भागने लगा था, लेकिन सामने पुलिस की दूसरी टीम मोर्चा संभाले हुए थी। दो फायर करते ही उसने सरेंडर कर दिया।
पुलिस अधिकारियों ने मांगा कोठी का रिकार्ड
देवीलाल पार्क के पास स्थित जिस कोठी से दो इनामी बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है, पुलिस के लिए वह पहेली बन गई है। पुलिस के अनुसार कोठी कई वर्षों से खाली है और इसमें कोई रहता भी नहीं है। वहीं, पुलिस ने कोठी के रिकार्ड के लिए हुडा के अधिकारियों से बातचीत कर रिकार्ड मांगा है।
पुलिस हुई सतर्क, बढ़ाई सुरक्षा
बदमाशों की गिरफ्तारी के बाद देवीलाल पार्क के आस-पास की सुरक्षा को देखते हुए जांच के लिए पुलिस ने एक स्पेशल टीम बनाई
है, जो दिन-रात गश्त करती रहेगी।
कोठी का रिकार्ड हुडा से मांगा गया है, ताकि यह पता लग सके कि यह किसकी कोठी है। कोठी मालिक को बुलाकर पूछताछ की जाएगी। नहीं तो फिर कोई कोठी में पनाह ले सकता है, जो सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है।
राहुल देव, डीएसपी क्राइम