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तत्कालीन नायब तहसीलदार सहित 3 पर केस दर्ज

Thu, 11 Aug 2016 12:23 AM IST
Sonipat
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केस - फोटो : demo
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पांची गुजरान गांव में फर्जी तरीके से पंचायती जमीन की रजिस्ट्री करने के मामले में पुलिस ने तत्कालीन नायब तहसीलदार जयवीर मलिक और तीन महिलाओं पर केस दर्ज किया है। बता दें कि तीन अगस्त को अमर उजाला ने इस मामले का खुलासा किया था। पुलिस ने इस संबंध में रोहतक स्थित रामगोपाल कॉलोनी निवासी सुशील कुमार की शिकायत पर कार्रवाई की है।
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पुलिस को दी शिकायत में शिकायतकर्ता सुशील कुमार ने बताया था कि गांव पांची गुजरान में पंचायती जमीन की फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराकर जमीन का व्यवसायिक प्रयोग किया जा रहा है। पुष्पा देवी, सरोज बाला, अनीता ने तत्कालीन नायब तहसीलदार जयवीर मलिक के साथ मिलकर भूमि को पुष्पा देवी के नाम करा दिया था। वर्ष 2008 और 2009 में इस जमीन में से 16 कनाल एक मरला जमीन को अनीता ने खरीद लिया और उस पर एक स्कूल खोल दिया।

वर्ष 2014 में अनीता ने इस जमीन का सौदा पुष्पा और पति वीरेंद्र से किया। जब रजिस्ट्री कराने का समय आया तो तत्कालीन तहसीलदार सतीश गुप्ता ने पंचायती जमीन बताकर उनकी रजिस्ट्री करने से मना कर दिया। इसके बाद पुष्पा देवी और पति वीरेंद्र सिंह ने तत्कालीन नायब तहसीलदार जयवीर मलिक से मिलीभगत करके 8 कनाल 10 मरला जमीन की रजिस्ट्री पुष्पा ने अपने नाम करा ली। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तत्कालीन नायब तहसीलदार जयवीर मलिक, सोनीपत निवासी पुष्पा, अनीता, सरोजबाला के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। जांच अधिकारी सतवीर ने कहा कि आरोपियों की तलाश की जा रही है।
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दो साल से नहीं हो रही थी कोई कार्रवाई
मामला सामने आने पर तत्कालीन डीसी समीरपाल सरों ने तत्कालीन संयुक्त सब रजिस्ट्रार की शक्तियां छीन ली थी और गन्नौर के तत्कालीन उपमंडल अधिकारी रिगन कुमार को इसकी जांच के आदेश दिए थे। जांच अधिकारी ने 24 जून 2014 को डीसी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि नायब तहसीलदार ने नियमों को ताक पर रखकर उक्त जमीन की रजिस्ट्री की है। उन्होंने रिपोर्ट में उनके खिलाफ विभागीय जांच व एफआईआर दर्ज करने की भी सिफारिश की थी।

हालांकि दो साल बीतने के बावजूद भी नायब तहसीलदार के खिलाफ न तो विभागीय कार्रवाई हुई और न ही एफआईआर दर्ज हुई। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब एक आरटीआई कार्यकर्ता ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सीएम विंडो का दरवाजा खटखटाया। इस पर एसडीएम सुभीता ढाका को जांच के आदेश दिए गए। जांच के बाद एसडीएम ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा कि उक्त रजिस्ट्री बिना जमाबंदी की गई हैं।
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