सोनीपत। कोरोना वायरस से आम लोगों की केवल सेहत तक असर नहीं पड़ रहा है, बल्कि इसका सीधा असर उद्योगों तक पर पडना शुरू हो गया है। विदेशों से माल आयात व निर्यात नहीं हो रहा है तो अब देश के दूसरे हिस्सों तक में माल नहीं पहुंच रहा है, जिससे फैक्टरियों में 40-60 प्रतिशत तक उत्पादन कम करना पड़ गया है। जिससे हर रोज लगभग 40 करोड़ रुपये तक का नुकसान होने की बात उद्यमी कर रहे है और यह नुकसान धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। उद्यमियों का मानना है कि इस तरह ही चलता रहा तो इससे उद्यमियों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
जिले में पांच औद्योगिक क्षेत्र है, जिनमें कुंडली, राई, मुरथल, बड़ी व सोनीपत है। लेकिन इनमें कुंडली, राई व बड़ी औद्योगिक क्षेत्र में ज्यादा फैक्टरी है और इन तीन जगह ही लगभग 5300 फैक्टरी है। जहां कुंडली में लगभग 2500 फैक्टरी है, वहीं राई में लगभग 1800 व बड़ी में लगभग एक हजार फैक्टरी है। इन तीनों ही जगह अधिकतर फैक्टरी में कोरोना वायरस के कारण उत्पादन रोकना पड़ा है तो किसी में उत्पादन को 40-60 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है। जिसका सबसे बड़ा कारण विदेशों से माल आयात व निर्यात नहीं होना है तो फैक्टरी में कोरोना वायरस के डर से एक साल सैंकड़ों मजदूरों से काम कराने में उद्यमी डर भी रहे है। कुंडली में लास्टिक दाना, स्टेनलेस स्टील का सामान, केमिकल, मोबाइल एसेसिरीज, टीवी के पार्ट्स, कपड़ा आदि की फैक्टरी है और इनके लिए अच्छी क्वालिटी व सस्ता माल होने के कारण विदेश से आयात होता है। यह माल का आयात पूरी तरह से रुक गया है तो यहां से विदेशों में तैयार माल भी निर्यात किया जाता है और वह भी अब रुक गया है। इस तरह ही राई औद्योगिक क्षेत्र में पाइप, रबड़ के सामान, दवाई आदि की फैक्टरी है, जिनमें इस समय दवाईयों की फैक्टरी सबसे ज्यादा चल रही है। लेकिन वहां अन्य फैक्टरी में उत्पादन लगभग ठप हो गया है और उसका भारी नुकसान उद्यमियों को उठाना पड़ रहा है। वहीं बड़ी औद्योगिक क्षेत्र में कपड़े की फैक्टरी व डाई की फैक्टरी काफी है, जिनमें काफी मजदूर काम करते है। लेकिन उद्यमियों ने कोरोना वायरस के डर से फैक्टरी बंद करके मजदूरों को भेज दिया है। क्योंकि उनको मजदूरों के एक साथ रहने से कोरोना वायरस का डर है, जिससे वहां के उद्यमी भी भारी नुकसान झेल रहे है। इससे उद्यमियों का नुकसान भी बढ़ता जा रहा है और इंस्ट्रीयल एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार एक अनुमान के आधार पर रोजाना लगभग 40 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। यह नुकसान आगे लगातार बढ़ता जा रहा है और इससे फैक्टरी मालिक परेशान होते दिख रहे है।
कोरोना वायरस के कारण उद्यमियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में 2500 से ज्यादा फैक्टरी है, जिनमें प्लास्टिक दाना, स्टेनलेस स्टील का सामान, केमिकल, मोबाइल एसेसिरीज, टीवी के पार्ट्स, कपड़ा आदि की फैक्टरी शामिल है। इन सभी में लगभग 60 प्रतिशत तक का उत्पादन ठप हो गया है और उससे करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। यहां अधिकतर माल विदेश से आता था तो यहां तैयार होकर अधिकतर सामान देश के बाहरी हिस्सों व विदेशों में जाता था। वह पूरी तरह से बंद होने के कारण उत्पादन रोकना भी पड़ा है। सुभाष गुप्ता, प्रधान कुंडली इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन
राई औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 1800 फैक्टरी है, जिनमें गत्ता पैकेजिंग की फैक्टरी सबसे ज्यादा है तो पाइप, रबड़ के सामान, दवाई आदि की फैक्टरी भी शामिल है। इनमें से केवल दवाईयों की फैक्टरी चल रही है, जबकि अन्य में काम 50 प्रतिशत तक ठप हो गया है। जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान रोजाना हो रहा है और इसका असर फैक्टरी मालिकों से लेकर मजदूरों तक पर पड़ रहा है। राकेश देवगन, प्रधान राई इंडस्ट्रीयल मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन
बड़ी औद्योगिक क्षेत्र में लगभग एक हजार फैक्टरी है, जिनमें डाई की ज्यादा फैक्टरी है तो टैक्सटाइल इंडस्ट्री भी काफी है। कोरोना वायरस के कारण इस समय अधिकतर फैक्टरी बंद करनी पड़ गई और मजदूर भी हटा दिए गए है। क्योंकि कोरोना वायरस की वजह से काम पूरी तरह से ठप है और कपड़े का निर्यात भी पूरी तरह से बंद हो गया है। जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। कोरोना वायरस खत्म होने के बाद ही फैक्टरी चलने की उम्मीद है। शमशेर शर्मा, प्रधान बड़ी इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन