सोनीपत। शहर के साथ ही गन्नौर, पानीपत व समालखा में ठोस कूड़ा उठान करने वाली जेबीएम कंपनी पर निगम अफसरों के साथ मिलकर करोड़ों रुपये का घालमेल करने का आरोप लगा है। आरोप है कि जेबीएम को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट की अनुमति के बिना 54.82 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। जिसमें से 13 करोड़ 86 लाख 78 हजार 273 रुपये नगर निगम सोनीपत तो गन्नौर नगर पालिका ने 2 करोड़ 37 लाख 95 हजार 252 रुपये दिए हैं। बाकी रुपये का भुगतान पानीपत व समालखा से किया गया है। आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर के जानकारी मांगने पर यह खुलासा हुआ है। आरटीआई में यह भी पता चला है कि जेबीएम कंपनी पर काम सही नहीं करने के कारण लगभग 10 लाख रुपये का जुर्माना लग चुका है। इसके बावजूद भी ठेका निरस्त नहीं किया गया। वहीं जेबीएम को ठोस कचरा प्रबंधन के लिए मुरथल में जमीन भी कौड़ी के भाव दे दी गई। इस तरह कंपनी का ठेका निरस्त करने के साथ ही उसे मिली रकम की वसूली करने की मांग की गई है।
जेबीएम कंपनी के पास सोनीपत शहर, गन्नौर शहर, संभालखा व पानीपत शहर का ठोक कूड़ा उठाने के साथ ही प्रबंधन का ठेका है। यह उसे भाजपा की पिछली सरकार में 2017-18 में मिला था। कंपनी को अभी तक हुए भुगतान के बारे में आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने सभी जगह से जानकारी मांगी थी। जिसमें खुलासा हुआ है कि जेबीएम पर निगम के अफसर पूरी तरह से मेहरबान हैं और उसको नियम के विरुद्ध लगातार भुगतान किया जा रहा है। कंपनी को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) की मॉनिटरिंग व अनुमति के बिना ही भुगतान किया जा रहा है। इसके अलावा आरटीआई से पता चला है कि भाजपा की पिछली सरकार में 6 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 2-9 जुलाई 2017 में पौलेंड व कजाकिस्तान का दौरा किया। जिसमें मुख्य अभियंता ओपी गोयल के मौजूद नहीं होने के बावजूद कंपनी के पक्ष में रिपोर्ट देकर कूड़ा प्रबंधन के लिए 22 साल का ठेका दे दिया गया। जबकि उसके लिए केवल विशेषज्ञ ही रिपोर्ट दे सकता था। इसके साथ ही जहां सरकार से जेबीएम कंपनी को करोड़ों रुपया दिया जा रहा है, वहीं डोर टू डोर कूड़ा उठाने के बदले लोगों की पर्चियां काटकर भी कंपनी करोड़ों रुपये वसूल रही है।
मुरथल में एक साल के लिए 4 हजार रुपये एकड़ कर दी जेबीएम कंपनी को लीज
ठोक कूड़ा प्रबंधन प्रोजेक्ट मुरथल में लगाने के लिए जेबीएम कंपनी को जमीन देने में बड़ा खेल दिख रहा है। क्योंकि प्राइवेट कंपनी को जितने में जमीन दी गई है, उतने में एक दुकान भी नहीं मिलती है। वहां 22 एकड़ जमीन को जेबीएम कंपनी को एक रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से 22 साल के लिए दी गई। जो 4 हजार 48 रुपये प्रति एकड़ साल के हिसाब से होती है। इसके साथ ही प्रोजेक्ट लगाने के लगभग 40 करोड़ रुपये भी कंपनी को दिए जाएंगे। जहां कूड़े से बिजली बनने के बाद जेबीएम कंपनी 10.60 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से सरकार को बिजली देगी। इस तरह साफ है कि नगर निगम लगातार जेबीएम कंपनी को जमीन से लेकर हर सुविधा कौड़ी के भाव दे रहा है। निगम उस पर रुपये भी लुटा रहा है और उसकी चीज को बड़े दाम में खरीदने की तैयारी है।
जेबीएम पर 10 लाख का जुर्माना लगने के बाद भी टेंडर निरस्त नहीं हुआ
आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर का आरोप है कि आरटीआई में मिली जानकारी के अनुसार अभी तक जेबीएम कंपनी पर कूड़ा उठान में लापरवाही बरतने पर लगभग 10 लाख रुपये का जुर्माना लग चुका है। जबकि ठेके की शर्तों के अनुसार 7 लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगने पर कंपनी का ठेका निरस्त किया जा सकता है। आरोप है कि जहां पहले लगभग 20 लाख रुपये में कूड़ा उठाया जा रहा था, उस पर नगर निगम अब लगभग 70 लाख रुपये खर्च कर रहा है। इसके साथ ही व्यवस्था में किसी तरह का कोई सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि कंपनी का ठेका निरस्त करने के साथ ही उसे किया गया अभी तक का भुगतान की रिकवरी की जानी चाहिए।
यह मामला जानकारी में आया है, लेकिन इसमें अभी हम कुछ नहीं कहना चाहते हैं। कंपनी की ओर से इसमें जल्द ही अपना पक्ष रखा जाएगा। कंपनी पर लगभग आठ लाख का जुर्माना लगा है। ठेके की शर्तों में ऐसा नहीं है कि सात लाख से ज्यादा जुर्माना लगने पर ठेका निरस्त हो जाएगा, बल्कि किसी एक कारण से इतना जुर्माना लगता है तो उसके बाद कुछ करने की कोई शर्त है। इस बारे में कंपनी जल्द ही अपनी अधिकारिक बात रखेगी।
-राजेंद्र सिंह, सीजीएम जेबीएम कंपनी
जेबीएम कंपनी के किसी तरह के घपले को लेकर मामला मेरे सामने नहीं आया था। लेकिन अब यह कागज देखे हैं और इसके आधार पर पूरी स्थिति का पता कराया जाएगा कि यह पूरा मामला क्या है। इसमें किसी तरह की गड़बड़ होगी तो उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
-श्यामलाल पूनिया, डीसी।