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निगम ने 11 माह में 290 करोड़ रुपये कमाए, इस बार 305 करोड़ का लक्ष्य

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विकास को लेकर शहर की सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। वित्त कमेटी के सामने अधिकारियों ने पूरे साल का लेखा-जोखा पेश किया। 11 माह में नगर निगम को 290.35 करोड़ की आय हुई है। वहीं शहर के विकास को लेकर निगम की ओर से 140.02 करोड़ रुपये विकास कार्यों पर खर्च किए गए, जबकि 184.73 करोड़ खर्च करने का लक्ष्य रखा गया था। ऐसे में बजट को लेकर 30 मार्च को डीआरडीए हॉल में होने वाली हाउस की बैठक में हंगामे के आसार हैं। नगर निगम की ओर से पांचवीं बार बैठक का समय बदला गया है। नए वित्त वर्ष के लिए 305.80 करोड़ का बजट तैयार किया गया है।
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निगम का आर्थिक रिपोर्ट कॉर्ड
मद तय लक्ष्य आय हुई अब लक्ष्य
गृह व फायर कर 25 करोड़ 13.50 करोड़ 25 करोड़
स्टांप ड्यूटी 85 करोड़ 79 करोड़ 20 करोड़
विकास शुल्क 10 करोड़ 7.20 करोड़ 10 करोड़
ट्रेड लाइसेंस 1.5 करोड़ 25 लाख 1 करोड़
फायर शुल्क 50 लाख 8.50 लाख 30 लाख
जमीन बिक्री 10 करोड़ 17.20 करोड़ 10 करोड़
किराया 1.10 करोड़ 89 लाख 1.10 करोड़
वर्ष 2020-21 के लिए 424.15 करोड़ रुपये हुए थे मंजूर
एक तरफ प्रदेश सरकार की ओर से शहरी स्थानीय निकाय विभाग की आर्थिक स्थिति सुधारने का वादा किया जा रहा है। वहीं शहर के विकास को लेकर वार्षिक बजट लगातार घटाया जा रहा है। वर्ष 2020-21 के लिए 424.15 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। वर्ष 2021-22 के लिए 356.81 करोड़ का बजट को मंजूर किया गया था। इस बार निगम की ओर से मात्र 305.80 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
छह साल में एक बार भी नहीं लगाया विज्ञापन का टेंडर
आय बढ़ाने के लिए निगम की ओर से विज्ञापन का टेंडर लगाने का दावा किया जा रहा है। छह साल में निगम की ओर से विज्ञापन का टेंडर नहीं लगाया गया है। इस बार बजट में विज्ञापन फीस 1.5 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया है। पिछले वर्ष दो करोड़ रुपये रखा गया था। टेंडर नहीं लगाए जाने के कारण इस मद से कोई फीस जमा नहीं हो पाई। वहीं मोबाइल टावर फीस से 10 लाख रुपये, गृहकर से 25 करोड़, स्टांप ड्यूटी शेयर से 20 करोड़, निगम की एफडी का ब्याज भी 8 करोड़ रुपये आने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
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सफाई व्यवस्था पर 960 लाख रुपये खर्च
नगर निगम ने सफाई व्यवस्था पर 30 करोड़ खर्च करने का लक्ष्य रखा था। उसके बावजूद निगम के अधिकारी 9 करोड़ 60 लाख रुपये खर्च कर पाए। इस बार निगम ने 25 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा है। वहीं नंदीशालाओं के खर्च पर 5 करोड़, कुत्तों की नसबंदी के लिए 1 करोड़ रुपये, कूड़े से बिजली उत्पादन पर 18 करोड़ खर्च करने का प्रस्ताव रखा गया है।
पार्कों में मरम्मत करने पर 102 लाख रुपये खर्च
नगर निगम की ओर से पार्कों में मरम्मत करने 250 लाख रुपये मंजूर हुए थे। उनमें से 102 लाख रुपये खर्च हो पाए हैं। इस बार 150 लाख रुपये का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं सार्वजनिक शौचालयों की मरम्मत के लिए 30 करोड़ रुपये मंजूर हुए थे। उनमें से निगम के अधिकारी 32.88 लाख खर्च कर पाए हैं। इस बार 150 लाख रुपये का प्रस्ताव रखा गया है।
वेतन व अन्य भत्तों पर 38.11 करोड़ खर्च
पिछले बजट में अधिकारियों, कर्मचारियों के वेतन व अन्य भत्तों पर 60 करोड़ मंजूर किए गए थे। उनमें से 38.11 करोड़ खर्च हो पाए। इस बार 52.10 करोड़ खर्च करने का प्रस्ताव निर्धारित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने नगर निगम को हिदायत दी थी कि विधानसभा में पेश होने वाले बजट के बाद निगम का बजट तय किया जाए। शहर के विकास, सुंदरीकरण करना मुख्य लक्ष्य है और इसी को ध्यान में रखकर बजट तैयार किया गया है।
एजेंडा तक नहीं दे पाए 16 पार्षद, टली बैठक
लोगों ने ने पार्षदों को शहर की सरकार में भागीदार बनाया। पार्षद उनके हकों की आवाज तक नहीं उठा पा रहे हैं। शहर के विकास के लिए नगर निगम ने बैठक से पहले एजेंडे मांगे थे। जिसके बावजूद 16 पार्षद तय समय पर निगम के अधिकारियों को एजेंडे तक नहीं दे पाए। ऐसे में नगर निगम को 28 मार्च को होने वाली बैठक को स्थगित करना पड़ा। बैठक को अब 30 मार्च को रखा गया है। वहीं, पार्षदों को भी एजेंडे देने के लिए दो दिन का समय दिया है।
वर्जन
अब नए वित्त वर्ष में निगम की तरफ से हाउस में रखने के लिए 305 करोड़ का बजट तैयार किया गया है। 28 मार्च को होने वाली हाउस की बैठक अब 30 मार्च को होगी। 30 मार्च को बैठक में बजट का प्रस्ताव रखा जाएगा। वहां से मंजूर होने के बाद दो अप्रैल तक मुख्यालय प्रस्ताव भेजकर बजट मंगाया जाएगा।
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- धर्मेंद्र सिंह, आयुक्त नगर निगम
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