अब दोनों ढाबों पर सील लगाने के साथ ही साफ कर दिया है कि उस समय तक इनकी सील नहीं खोली जाएगी, जब तक यहां खाना खाने वाले सभी लोगों की कांट्रेक्ट ट्रेसिंग पूरी नहीं होगी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर उनके यहां आने वालों का रिकार्ड नहीं होगा तो प्रशासन उनको कैसे तलाश करेगा। क्योंकि दोनों ढाबों पर रोजाना लगभग 30 हजार लोग खाना खाने आते हैं।
इसके साथ ही डीसी श्यामलाल पूनिया ने सभी ढाबों पर काम करने वालों की कोरोना जांच कराने के आदेश दिए हैं। जबकि पहले केवल उन ढाबों पर जांच कराई जा रही थी, जहां ज्यादा कर्मी काम करते थे। ढाबों को सैनिटाइज भी कराया जा रहा है, जिससे संक्रमण आगे नहीं फैल सके।
सीसीटीवी फुटेज के सहारे भी जांच हो रही
एसडीएम विजय सिंह ने बताया कि इन ढाबों से पूरा रिकार्ड मांगा जा रहा है और वहां की सीसीटीवी फुटेज भी देखी जा रही है। जिससे वहां आने वाले लोगों का पता लगाया जा सके और उनकी जांच कराई जा सके। ढाबों पर अभी रिकार्ड मांगा गया है और वह रिकार्ड नहीं देते हैं तो नियमों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने ढाबा संचालकों को साफ कहा है।
मुरथल गांव के लोग ढाबा संचालकों के विरोध में उतरे
मुरथल गांव में शुक्रवार को लोगों की पंचायत हुई, जहां सुखदेव व गरम धरम ढाबे के साथ मुरथल का नाम जोड़े जाने पर रोष जताते हुए विरोध किया गया। नरेंद्र कोच, प्रकाश, सुरेंद्र, सुखबीर आदि ने कहा कि इन ढाबों पर जब भी गलत होता है तो उनके साथ मुरथल का नाम जोड़ दिया जाता है। इसलिए ढाबा संचालकों को अपने ढाबे के साथ सही जगह का नाम लिखने के लिए कहा गया और ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई कराने की चेतावनी दी गई है।