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संकट के सिपाही : कोरोना के बीच खाकी पहन ड्यूटी के साथ निभा रही हैं मां का फर्ज 

Sun, 09 May 2021 05:45 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, सोनीपत

सार

  • मदर्स-डे पर आज मिलिये संकट के इन सिपाहियों से
  • कहती हैं कि ड्यूटी के दौरान हर रोज बच्चों से नहीं हो पाती मुलाकात
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मातृ शक्ति... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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जहां कोरोना महामारी से हर कोई डरा हुआ है, वहीं पुलिस महकमे में नारी शक्ति योद्धा की तरह मैदान में डटी हैं। महिला पुलिसकर्मी दोहरी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रही हैं। पूरा दिन कोरोना से लोगों को बचाने के लिए लॉकडाउन की ड्यूटी और इसके बाद बच्चों को इस संक्रमण से बचाने की जद्दोजहद। कोई दूध पीते बच्चे को तो कोई किशोरावस्था में पहुंच चुके बच्चों को छोड़कर अपने फर्ज को पूरा कर रही हैं। उनके इस समर्पण को हर कोई सलाम कर रहा है। मदर्स-डे पर अमर उजाला की विशेष रिपोर्ट...

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कोरोना महामारी को रोकने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। मुझे ऐसे कठिन हालात में देशसेवा का मौका मिला है। जिसके चलते लोगों की सेवा करने के लिए आपातकालीन ड्यूटी में लगी हूं। अब तो सुबह से रात तक बिना वजह बाहर निकल रहे लोगों को समझाने में ही समय गुजर रहा है। घर पर मेरी बेटी वंशिका (18) है। कई बार घर नहीं पहुंच पाती हूं तो बेटी से व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल से ही बात करनी पड़ती है। बेटी कहती है कि मां तुम योद्धा हो, जैसे हमें संभाला है अपना भी खयाल रखना। ऐसे में बेटी से बातचीत कर दूसरों की रक्षा का जज्बा अधिक बढ़ जाता है। 
- प्रमिला सिंह, महिला थाना प्रभारी

खाकी के साथ ही बच्चों की भी जिम्मेदारी संभाल रही हूं। मेरे पास दो बच्चे हैं। दस साल का यश व सात साल का लक्षित। ड्यूटी के लिए सुबह पांच बजे उठकर तैयारी शुरू करनी पड़ती है। मेरे पति जितेंद्र सिंह खुद का बिजनेस संभालते हैं। ऐसे में कई बार जब मुझे जल्दी निकलना होता है तो पति के सहारे बच्चों को छोड़कर जाना पड़ता है। अब तो कोरोना संक्रमण काल में 12 घंटे तक नाके पर ड्यूटी देनी पड़ रही है। ऐसे में जब पति बाहर होते हैं तो बच्चों को पड़ोसियों के पास छोड़कर जाना पड़ता है। फर्ज के आगे बच्चों को अलग रखने को मजबूर होना पड़ता है। देर शाम या रात को ड्यूटी से जाती हूं तो बच्चों को कमरे में तब तक अलग रखती हूं। जब तक वो खुद को पूरी तरह सैनिटाइज करने के साथ ही सुरक्षित न कर लूं। सरिता कहती हैं कि बच्चों के साथ खाकी का फर्ज भी बड़ा है।
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- एएसआई सरिता, थाना सिटी सोनीपत 

मेरे पास एक बेटा और एक बेटी हैं। अपनी ममता के साथ भारत मां की सेवा को तत्पर रहती हूं। बेटा-बेटी को दादी के पास पानीपत में छोड़कर ड्यूटी पर निकल पड़ती हूं। कई बार तो कई दिन तक बच्चों से दूर रहना पड़ता है। कई बार तो मेरे बच्चे भी मुझे हौसला देते हैं। उनकी फिक्र तो रहती है, लेकिन कर्त्तव्य का निर्वाह करना पहले जरूरत है। बेटी खुशी और बेटा विनायक सदैव मुझे हौसला देते रहते हैं। ड्यूटी के दौरान खुद के संक्रमण का खतरा रहता है, वहीं मां का फर्ज निभाते हुए बच्चों को भी संक्रमण से बचाना होता है। हर बार मेरी बेटी मदर्स-डे पर कोई सरपराइज देती थी, लेकिन कोरोना के चलते इस बार शायद उनसे मुलाकात नहीं हो सकेगी। ऐसे में वीडियो कॉल से ही उनसे संपर्क हो सकेगा। 
- बबली, एसआई, मुरथल थाना

मेरे पास दो बेटियां हैं, जिनमें छोटी महज डेढ़ साल की है। बेटियों की देखभाल के साथ ही पुलिस की ड्यूटी का फर्ज पूरी शिद्दत से निभा रही हूं। सुबह साढ़े पांच बजे उठकर घर का काम निपटाती हूं। उसके बाद पति-पत्नी दोनों ही ड्यूटी पर निकल लेते हैं। मेरे पति प्रवीन कुमार भी हरियाणा पुलिस में ही कार्यरत हैं। ऐसे में कई बार तीन साल की बेटी शगुल व डेढ़ साल की बेटी वंदिता को पड़ोस में रह रहे परिवार के साथ छोड़कर जाना पड़ता है। कई बार तो उन्हें थाने में भी ले जाना पड़ता है। ड्यूटी से घर जाने के बाद खुद को सैनिटाइज कर और वर्दी धोकर ही बेटियों से दुलार कर पाती हूं। कर्त्तव्य का निर्वाह मेरी प्राथमिकता है।
- सोनू रानी, महिला थाना सोनीपत

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एक साल से ग्रामीणों बैंक उपभोक्ताओं की जरूरत बने स्वतंत्र

स्वतंत्र देव - फोटो : amar ujala
स्वतंत्र देव कोतवाल, एडवोकेट (उधमपुर) 
कोरोना संकट में चीफ वार्डन सिविल डिफेंस उधमपुर एडवोकेट स्वतंत्र देव कोतवाल एक वर्ष से भी अधिक समय से जेके बैंक हाउसिंग कालोनी के बाहर लोगों की सेवा कर रहे हैं। वह बैंक पहुंचने वाले अशिक्षित और ग्रामीण इलाकों के फार्म भरने में मदद कर रहे हैं।

कोरोना योद्धा के रूप में एडवोकेट स्वतंत्रदेव कोतवाल ने नई मिसाल कायम की है। देश में कोरोना संकट शुरू होने पर पहला लॉकडाउन लगाया गया तो एडवोकेट स्वतंत्रदेव कोतवाल ने जेके बैंक के बाहर लंबी कतारों में लगे लोगों को फार्म भर कर मदद करना शुरू किया, जो आजतक जारी है। वह बैंक खुलने और बंद होने तक बैंक के बाहर बैठ कर लोगों की मदद करते हैं। 

स्वतंत्र देव कोतवाल ने बताया कि 13 माह और 14 दिन से यह काम कर रहे हैं। उनका उद्देश्य कोरोना काल में बैंक पहुंचने वाले जरूरतमंदों की सेवा करना है, ताकि उन्हें भटकना न पड़े। यह मुहिम आगे भी जारी रहेगी। इसके अलावा वह बैंक उपभोक्ताओं को कोरोना से बचने के निरंतर जागरूक भी कर रहे हैं।
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