गोहाना। ग्रामीणांचल में जलस्रोत केवल पानी का माध्यम नहीं बल्कि पशुधन और पर्यावरण की जीवनरेखा भी माने जाते हैं। इसके बावजूद गढ़ी उजाले खां और गढ़ी सराय नामदार के बीच स्थित मियांवाला जोहड़ आज उपेक्षा और अव्यवस्था का शिकार होकर अपनी पहचान खोता जा रहा है।
दोनों गांवों की नालियों का दूषित पानी लगातार इस जलाशय में पहुंचने से इसकी स्थिति चिंताजनक हो चुकी है जिसका सबसे अधिक असर पशुपालकों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार एक समय था जब यह जोहड़ क्षेत्र के पशुओं की प्यास बुझाने के साथ-साथ उन्हें नहलाने और ग्रामीण गतिविधियों का प्रमुख केंद्र हुआ करता था।
वर्तमान में हालात ऐसे हैं कि यहां जमा पानी से तेज दुर्गंध उठती है और पशुओं को इसके संपर्क में लाना भी जोखिम भरा माना जा रहा है। इससे पशुपालकों को अपने स्तर पर पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। गांव में पशुपालन बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका का आधार है।
गर्मी में पशुओं की जल आवश्यकता बढ़ जाती है लेकिन प्राकृतिक स्रोत अनुपयोगी होने से उनकी देखभाल और अधिक कठिन हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह जलाशय पूरी तरह समाप्त होने की कगार पर पहुंच जाएगा।
ग्रामीणों के अनुसार समाधान भी गांव के पास ही मौजूद है। निकट से गुजर रही ड्रेन नंबर-8 में दूषित पानी के बहाव को मोड़ दिया जाए तो जलाशय को प्रदूषण से मुक्त किया जा सकता है। इसके बाद सफाई, गहरीकरण और स्वच्छ जल उपलब्ध करवाकर इसे दोबारा उपयोगी बनाया जा सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से इस मुद्दे को प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष उठाया जा रहा है लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उनका मानना है कि जलाशय का संरक्षण केवल पशुपालकों की जरूरत नहीं बल्कि पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण विरासत को बचाने के लिए भी जरूरी है।
क्या बोले ग्रामीण
खानपुर रोड स्थित यह जलाशय दोनों गांवों की साझी संपत्ति है लेकिन लगातार दूषित पानी डाले जाने से इसकी हालत बेहद खराब हो गई है। अब यहां पशुओं को पानी पिलाना संभव नहीं रहा। मजबूरी में हमें दूर से पानी उपलब्ध कराना पड़ता है। इससे समय और संसाधन दोनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
- सुभाष सैनी, पशुपालक
कुछ वर्ष पहले तक यहां नहर का पानी पहुंचता था और पशुओं को पर्याप्त स्वच्छ जल मिल जाता था। अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। यदि दूषित पानी को रोका जाए और दोबारा साफ पानी उपलब्ध कराया जाए तो यह स्थान फिर से पशुधन के लिए उपयोगी बन सकता है।
- रवि कुमार, दुकानदार एवं पशुपालक
मौजूदा स्थिति में पशुओं को इस जलाशय तक ले जाना भी उचित नहीं समझते। इससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। यदि जलाशय को अलग-अलग हिस्सों में विकसित कर एक ओर निकासी और दूसरी ओर स्वच्छ जल की व्यवस्था की जाए तो समस्या का व्यावहारिक समाधान निकल सकता है।
- बिजेंद्र, पशुपालक
करीब दो दशक पहले तक यह स्थान गांव की पहचान हुआ करता था। बच्चे यहां तैराकी तक करते थे और पशुधन की देखभाल भी यहीं होती थी। दूषित पानी ने इसकी उपयोगिता लगभग समाप्त कर दी है। प्रशासन को कई बार प्रस्ताव और मांगपत्र दिए जा चुके हैं। अब समय आ गया है कि इसके पुनरुद्धार और सुंदरीकरण के लिए ठोस योजना बनाई जाए।
- रविंद्र लड़वाल, सरपंच, गढ़ी उजाले खां
गोहाना के गांव गढ़ी उजाले खां का साइन बोर्ड। संवाद
गोहाना के गांव गढ़ी उजाले खां का साइन बोर्ड। संवाद
गोहाना के गांव गढ़ी उजाले खां का साइन बोर्ड। संवाद
गोहाना के गांव गढ़ी उजाले खां का साइन बोर्ड। संवाद
गोहाना के गांव गढ़ी उजाले खां का साइन बोर्ड। संवाद
गोहाना के गांव गढ़ी उजाले खां का साइन बोर्ड। संवाद