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विश्व कल्याण ही निरंकारियों का मिशन, स्वयं को मानवीय गुणों से युक्त करें : सुदीक्षा महाराज

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निरंकारी संत समागम में मुख्य मंच की तरफ सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज को लेकर जाते श्रद्धालु। - फोटो : Sonipat
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गन्नौर (सोनीपत)। सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज ने कहा कि संतों के दिए गए ज्ञान को जीवन में उतारना है और यह ज्ञान रूपी रोशनी अपने तक सीमित न रखते हुए इससे दूसरों को भी रोशन करना है। प्रेरणा केवल बोल से नहीं, बल्कि अपने व्यावहारिक जीवन से रोशनी को हर किसी तक ले जाना है। स्वयं को मानवीय गुणों से युक्त करें और नकारात्मक भावनाओं को त्याग कर सही मायनों में मनुष्य बन कर जीएं। हमारी सारी उपलब्धियां परमात्मा की कृपा है और हमें उनका सदुपयोग करना है। सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज सोमवार को निरंकारी संत समागम के अंतिम सत्र में भक्तों को मानवता का संदेश दे रही थीं।
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सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज ने कहा कि हमारे व्यवहार में विनम्रता अवश्य होनी चाहिए और जितना भी हमें प्राप्त हुआ है, वह इस निरंकार प्रभु की ही देन है। हमें अपने सभी गुणों का सदुपयोग दूसरों के परोपकार में लगाना चाहिए। जैसे एक माचिस की तीली एक दीपक को भी रोशन कर सकती है और किसी के घर को भी जला सकती है। इस तरह केवल हमारी सोच और कार्य से फर्क पड़ता है। हमें सही मायनों में इंसान बनना है और सदैव इंसानियत का ही प्रमाण देना है। जैसे हम विभिन्न तरह की वेशभूषा पहनते हैं, वैसे हमारे शरीर अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन हमारी आत्मा परमात्मा का ही स्वरूप है, निरंकार का अंश ही है और अगर यह परमात्मा की अंश है तो हमारे अंदर गुण भी वैसे ही होने चाहिए।
संत निरंकारी मिशन के 90 वर्षों के इतिहास को याद करते हुए सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज ने कहा कि बाबा बूटा सिंह, बाबा अवतार सिंह, जगत माता बुद्धवंती के प्रारंभिक योगदानों के बाद उसी लड़ी में बाबा गुरुबचन सिंह और राजमाता कुलवंत कौर ने अपने समय में सीमित साधनों का पूरा उपयोग करते हुए न केवल देश के कोने-कोने में अपितु विदेशों में भी इस सत्य की आवाज को फैलाया। साथ ही उन्होंने समाज कल्याण जैसे सादा विवाह, सामाजिक उत्थान के कार्यों में भी अपना योगदान दिया।
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सबको प्यार बांटना सिखा रहीं सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज : परणीत कौर
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरेंद्र सिंह की पत्नी परणीत कौर ने समागम में पहुंचकर सुदीक्षा माता से आशीर्वाद लिया। परणीत कौर ने कहा कि निरंकारी सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज सबको प्यार बांटना सिखा रहीं हैं। प्यार बांटने से बढ़ता है। निरंकारी मिशन प्रेम और भाईचारे का एक प्रेरक अभियान है। समागम में उमड़ी भक्तों की भीड़ ने लाखों की संख्या में पहुंचकर संदेश दिया है कि निरंकार परमात्मा के प्रति अपने प्रेम का इजहार है, वहीं प्रेम की सीख देने वाले सद्गुरु का शुकराना कर, एक दूसरे के गले मिल शुभकामनाएं दे रहा है।
समागम में माता सुदीक्षा से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने लिया आशीर्वाद
निरंकारी संत समागम में पूर्व मुख्यमंत्री एवं विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा पहुंचे और सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज से आशीर्वाद लिया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि संत निरंकारी मिशन के संत महात्माओं ने सारे विश्व को सभ्य समाज और मानवता के प्रति समर्पित होने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि समागम अनेकता में एकता की मिशाल है। यहां आकर लोग भाईचारे, एकता, समानता का संदेश लेकर जाते है। भारत धार्मिक और सांस्कृतिक राष्ट्र है और देश की इसी धरती पर विश्व के अधिकतर धर्मों ने जन्म लिया। समागम में आए श्रद्धालु ब्रह्मज्ञान से देखते है कि हम सभी एक ही पिता की संतान हैं। संत निरंकारी मिशन पूरी दुनिया के लिए एक संदेश देता है। पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि भारत में ही नहीं, विदेश में भी संत निरंकारी महोत्सव होते हैं। हमारे लिए यह गौरव की बात है कि प्रदेश धरती पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का संत निरंकारी समागम देखने को मिल रहा है। इस दौरान उनके साथ एमएस चोपड़ा भी थे।
बच्चों के जीवन में मिशन के संदेश देने के लिए बाल प्रदर्शनी
संत निरंकारी मिशन ने बाल प्रदर्शनी का भी आयोजन किया। यह प्रदर्शनी बच्चों के द्वारा मॉडल और एनीमेशन के आधार पर तैयार की गई है, जिसमें बच्चों के जीवन में मिशन के संदेश का महत्व उजागर किया गया है। प्रदर्शनी में दिखाया गया है कि बाबा बूटा सिंह द्वारा एक ज्ञान रूपी पौधा लगाया गया। वक्त के साथ बाबा गुरबचन सिंह, बाबा हरदेव सिंह व सद्गुरु माता सविंदर, जगतमाता बुद्धवंती, राजमाता कुलवंत कौर व अनेक महापुरुषों के प्रयासों से यह पौधा अब पेड़ बन चुका है। वर्तमान सद्गुरु माता सुदीक्षा के संरक्षण में आगे बढ़कर पूरी मानवता को प्रेम, एकत्व, विश्व भाईचारे, सहनशीलता के फल बांट कर पूरी मानवता में मिठास फैला रहे हैं।
प्रदर्शनी में प्रदूषण मुक्ति का संदेश
बाल प्रदर्शनी के अन्य मॉडल द्वारा यह भी समझाया गया है कि जिस प्रकार अच्छी बातें देर तक मस्तिष्क पटल पर अंकित रहती हैं, उसी प्रकार बुरे विचार दिमाग से जल्दी निकाल कर अच्छे भाव भरना जरूरी है। एक अन्य मॉडल में प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग से हमारी धरा प्रदूषित हो रही है और उसे स्वच्छ करने की आवश्यकता है इसी प्रकार से हमें अपने मन के द्वेष, ईर्ष्या जैसे भाव निकालकर उसे भी निर्मल करने की जरूरत है। इस प्रदर्शनी में प्रदूषण अंदर का हो या बाहर का दोनो हानिकारक हैं विषय पर एनिमेशन मूवी भी दिखाई गई।
मानव शरीर को स्वस्थ रखने के उपाय
निरंकारी मंडल के स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग ने भी अपनी गतिविधियों की प्रदर्शनी लगाई है। जिसमें मानव शरीर को स्वस्थ रखने के उपायों को दर्शाया गया है। संत निरंकारी मंडल के स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग की ओर से समागम के दौरान 11 डिस्पेंसरियां लगाई र्गईं, जिनमें कुल 87 बिस्तरों का भी प्रबंध किया गया। इनके अतिरिक्त 19 प्राथमिक सहायता केंद्र, 24 एंबुलेंस उपलब्ध रहे। गंभीर अवस्था में मरीजों को निकट के पानीपत, सोनीपत एवं दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में पहुंचाने का प्रबंध भी किया गया। एलोपेथिक, आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक इन तीनों शाखाओं के उपचारों का समावेश किया गया।
समागम में दिव्यांगों का रखा गया विशेष ध्यान
अध्यात्मिक स्थल में जहां लाखों श्रद्धालुओं के रहने खाने पीने आदि का प्रबंध किया गया है, वहीं दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए संत निरंकारी मंडल कमेटी की ओर से सत्संग पंडाल के निकट कैंप लगाया गया है, जिसमें दिव्यांग श्रद्धालुओं के खानपान, ठहरने शौचालय तथा मेडिकल व्यवस्था के पूरे प्रबंध किए गए हैं। दिव्यांगों को उनके कैंपस में ही संत समागम कार्यक्रम इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन से दिखाया जा रहा है, ताकि संत समागम के कार्यक्रम आसानी से देख व सुन सके। समागम के दौरान सामूहिक लंगर मानव-मात्र में समानता एवं एकता का अद्भुत प्रतीक रहा। मिशन की सिखलाई के अनुसार यहां भेदभाव की सारी दीवारें गिरती नजर आती हैं और दीवार रहित संसार की ओर अग्रसर होने का प्रमाण यहां मिला।

निरंकारी संत समागम में प्रवचन करतीं सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज।- फोटो : Sonipat

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