साहित्यकार सम्मान योजना के तहत वीरवार को चंडीगढ़ के टैगोर थियेटर में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जिले के पांच साहित्यकारों को विभिन्न सम्मान से नवाजा। हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से वर्ष 2017, 2018 व 2019 के पुरस्कार के लिए साहित्यकारों का चयन किया गया था, जिन्हें वीरवार को सम्मानित किया गया।
इन साहित्यकारों में डॉ. संतराम देशवाल, डॉ. कमलेश मलिक, डॉ. अशोक बत्रा, डॉ. राजेंद्र सिंह बड़गुज्जर व डॉ. ज्योति लठवाल शामिल हैं। गत वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते सम्मान समारोह का आयोजन नहीं किया जा सका था। हालांकि साहित्यकारों की इनामी राशि उनके खातों में भेज दी गई थी।
डॉ. संतराम देशवाल महाकवि सूरदास आजीवन साहित्य साधना पुरस्कार से सम्मानित
सेक्टर-15 निवासी साहित्यकार डॉ. संतराम देशवाल को हरियाणा साहित्य अकादमी के प्रतिष्ठित पुरस्कार महाकवि सूरदास आजीवन साहित्य साधना पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस सम्मान के लिए उन्हें पांच लाख की राशि के साथ प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न, शॉल और अंग वस्त्र भेंट किया गया। उन्हें वर्ष 2014 में जनकवि मेहर सिंह पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इनकी लोक आलोक (ललित निबंध) और अनकहे दर्द (कविता) को साहित्य अकादमी ने सर्वश्रेष्ठ पुस्तक पुरस्कार दिया जा चुका है। डॉ. देशवाल को सर्वोत्तम पत्रकारिता सम्मान, लोक शिरोमणि सम्मान, बाल मुकुंद गुप्त साहित्य सम्मान, सर्वोत्तम शिक्षक सम्मान, हिंदी सहस्त्राब्दी सम्मान, काव्य कलश सम्मान, सोनीपत रत्न सम्मान दिए जा चुके हैं।
डॉ. अशोक बत्रा को आदित्य अल्हड़ बीकानेरी हास्य सम्मान से सम्मानित
हिंदू महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य एवं राष्ट्रीय कवि डॉ. अशोक बत्रा को सन 2019 के आदित्य अल्हड़ हास्य सम्मान से सम्मानित किया गया। डॉ. बत्रा अब तक 50 से भी अधिक पुस्तकें लिख चुके हैं। उनकी कुछ प्रसिद्ध पुस्तकों में सन 1857, तेजपुंज विवेकानंद, रामचंद्र शुक्ल : व्यक्तित्व एवं कृतित्व, कुछ शिक्षक कवि, आधुनिक हिंदी व्याकरण, नवयुग हिंदी व्याकरण, विशेष हिंदी व्याकरण और आधुनिक मीडिया व रचना शामिल हैं। पुस्तकों के अतिरिक्त डॉ. अशोक बत्रा देशभर में हास्य कविताओं से मनोरंजन करते रहे हैं।
डॉ. कमलेश मलिक को श्रेष्ठ महिला रचनाकार सम्मान से नवाजा
शहर के मॉडल टाउन सुजान सिंह पार्क निवासी डॉ. कमलेश मलिक को 2019 के श्रेष्ठ महिला रचनाकार सम्मान से नवाजा गया। कविता, कहानी, लघु कथा आदि साहित्यिक विधाओं पर उनकी अच्छी पकड़ है। उनकी पुस्तक शंकराचार्य और हरियाणा का संत साहित्य प्रशंसनीय रही है। सन 2010 में उनके कहानी संग्रह सिर्फ अपने लिए और 2018 में उनके कहानी संग्रह एक मोर्चा और को श्रेष्ठ कृति के रूप में पुरस्कार किया गया। वे समाज के पिछड़ा वर्ग और जरूरतमंद बच्चों के उत्थान व महिला सशक्तीकरण के लिए संलग्न हैं। वे अदबी संगम एवं महिला काव्य मंच जैसी संस्थाओं से जुड़ी रहकर नारी लेखन को प्रश्रय दे रही हैं। अनेक साहित्यिक व सामाजिक संस्थाओं द्वारा उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. कमलेश मलिक को न्यूज एंकर मीमांसा मालिक और रंगमंच एवं बॉलीवुड अभिनेत्री मेघना मलिक की मां होने का भी गौरव प्राप्त है।
डॉ. राजेंद्र सिंह बड़गुज्जर जनकवि मेहर सिंह सम्मान से सम्मानित
गांव मलिकपुर निवासी साहित्यकार डॉ. राजेंद्र सिंह बड़गुज्जर साहित्य साधना के साथ समाजसेवा में भी अग्रसर रहते हैं। डॉ. बड़गुज्जर को जनकवि मेहर सिंह सम्मान से सम्मानित किया गया। डॉ. राजेंद्र ने इनामी राशि के दो लाख रुपये में से एक लाख 22 हजार रुपये सामाजिक कार्यों के लिए दान कर दिए। उन्होंने अपने पैतृक गांव मलिकपुर के स्कूल में अपने पिता चौ. ताराचंद की स्मृति में एक लाख रुपये से इंटरलॉकिंग टाइल्स की सड़क बनवाई है। वह मौजूदा समय में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी बिहार में हिंदी विभाग के अध्यक्ष हैं। डॉ. बड़गुज्जर ने बताया कि शेष इनामी राशि से अपने पैतृक गांव में अप्रैल में सांग और लोगों के लिए भोज का आयोजन करवाएंगे। डॉ. बड़गुज्जर लोक कवियों का शोध करते हुए 33 पुस्तकें लिख चुके हैं। अब उनका चयन देश के प्रमुख 13 शोधार्थियों में हुआ है। वे अगले दो साल भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला में रहकर शोधकार्य करेंगे।
डॉ. ज्योति लठवाल को युवा लेखक पुरस्कार से नवाजा
शहर के जीवन विहार निवासी डॉ. ज्योति लठवाल को युवा लेखक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। डॉ. ज्योति लठवाल ने एमए हिंदी, नेट जेआरएफ में प्रथम स्थान से हासिल किया था। डॉ. ज्योति ने महर्षि दयानंद विवि रोहतक से तीन साल में पीएचडी की और इसी दौरान तीन पुस्तकें लिखी। इनके 10 शोधपत्र राष्ट्रीय पत्रिकाओं में छप चुके हैं। पांच शोध अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ. ज्योति के पिता दिलावर सिंह लठवाल आर्मी से सेवानिवृत्त हैं।