गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में निकाली गई किसान ट्रैक्टर यात्रा के बाद से सैकड़ों किसानों के लापता होने का दावा संगठनों के नेताओं ने किया है और इस बारे में पता चलने पर उनकी तलाश शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है और किसान के लापता होने की सूचना देने के लिए कहा गया है, जिससे उसको तलाश किया जा सके। वहीं किसी किसान को दिल्ली पुलिस पकड़ती है तो उसका मुकदमा किसान मोर्चा की तरफ से लड़ा जाएगा। वहीं किसान नेताओं ने शनिवार को सद्भावना दिवस मनाते हुए उपवास रखा और मंच से भाईचारा व शांति व्यवस्था बनाए रखने का संदेश दिया गया। कुंडली बॉर्डर पर किसानों के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है।
किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने दावा किया है कि गणतंत्र दिवस ट्रैक्टर परेड के बाद से सैकड़ों किसान लापता हैं, जिनका कोई पता नहीं चल रहा है। उनके बारे में पुलिस भी कुछ नहीं बता रही है तो वह लौटकर अपने घर भी नहीं पहुंचे है। इसलिए ही लापता किसानों की तलाश को यूनियन ने शनिवार को हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। इस नंबर 9315848586 पर ऐसे लोगों की जानकारी दी जा सकती है। जितने भी किसानों से उनके परिवार वालों का संपर्क नहीं हो रहा है, उसकी भी जानकारी इस नंबर पर दे सकते है। किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि केस व लापता किसानों की जानकारी इस नंबर पर दें। इसके लिए एक पदाधिकारी हरपाल को नियुक्त भी किया गया है। गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि किसी भी आंदोलनकारी किसान पर कोई मुकदमा होता है तो उसके सभी केस मोर्चा की तरफ से लड़ा जाएगा।
सद्भावना दिवस मनाकर किसान नेता उपवास पर रहे
गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में बवाल के बाद किसान नेताओं ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि को सद्भावना दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया था और उपवास रखने की बात कही थी। इस पहले से तय कार्यक्रम के तहत किसान नेताओं ने सद्भावना दिवस मनाते हुए उपवास रखा। किसान नेता दिनभर उपवास रखकर मंच पर बैठे रहे। मंच से भाईचारा व शांति व्यवस्था बनाए रखने का संदेश दिया गया।
कुंडली बॉर्डर पर लगातार पहुंच रहे किसान
गणतंत्र दिवस पर बवाल के बाद किसान वापस अपने घर लौट रहे थे, लेकिन अब पिछले दो दिन से किसानों का कुंडली बॉर्डर पर वापस पहुंचने का सिलसिला दोबारा से शुरू हो गया है। इस बार हरियाणा के किसान ज्यादा पहुंच रहे है तो पंजाब के किसान भी दोबारा से बॉर्डर पर पहुंच रहे है। जिससे बॉर्डर पर किसानों की तादात बढ़ती जा रही है।