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Sonipat News: शीतलहर के बीच ठंड बढ़ने से नौनिहाल हो रहे बीमार, अस्पताल में बढ़ी भीड़

Fri, 03 Jan 2025 12:42 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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सोनीपत। बारिश के बाद शीतलहर चलने से ठंड में इजाफा हुआ है। इस बीच बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसका सीधा प्रभाव बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ा है। इसके चलते बच्चे सर्दी, खांसी और बुखार की चपेट में आ रहे हैं। सरकारी व निजी अस्पतालाें में अभिभावक अपने बच्चों को लेकर पहुंच रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ की ओर से बच्चों को ठंड से बचाने की सलाह दी जा रही है। निमोनिया के साथ बच्चों में कोल्ड डायरिया के भी लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
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तीन दिन से मौसम में आए परिवर्तन की वजह से सूर्य दिखाई तो दे रहे हैं, लेकिन उनकी किरण भी जमीन पर नहीं पड़ रही। ठंड बढ़ने से बच्चों की सेहत खराब हो रही है। दिन-रात के तापमान में काफी अंतर है। वीरवार को अधिकतम तापमान 14.2 और न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम में यही बदलाव लोगों की सेहत पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में सुबह नौ बजे से ही भीड़ लग रही है। अस्पताल में बच्चों की ओपीडी 250 से ज्यादा पहुंच गई है। सामान्य दिनों में यह ओपीडी 100 से 150 होती थी।

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल सैनी का कहना है कि अधिकांश बच्चे बुखार, खांसी, जुकाम की चपेट में आ रहे हैं। निमोनिया सांस से जुड़ी बीमारी है। पांच साल से छोटे बच्चों को इससे खतरा अधिक रहता है। शुरुआत में बच्चों को सर्दी एवं खांसी की समस्या होती है। एहतियात न बरतने पर बच्चे निमोनिया की गिरफ्त में आ जाते हैं। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे में सर्दियों के मौसम में बच्चों का खासतौर से ध्यान रखने की जरूरत है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अलंकृता गेरा का कहना है कि दोपहर में जब धूप निकलती है तब भी बच्चों को पर्याप्त कपड़े पहनाकर रखें। पीने के लिए गुनगुना पानी दें और सही मात्रा में पानी पिलाते रहे। मौसमी फलों का प्रयोग करें। सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों को ठंड से बचाने का प्रयास करें। उन्होंने बताया कि सर्दी में बच्चे नहाने से परहेज करते हैं, जिससे उन्हें चर्म रोग भी होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में प्रतिदिन गुनगुने पानी से बच्चों का शरीर साफ करना चाहिए। प्रतिदिन साफ कपड़े पहनाने चाहिए।
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निमोनिया के लक्षण
- सर्दी, खांसी व जुकाम का बना रहना
- बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होना
- दूध न पीना
- दूध पीते ही उल्टी कर देना
- सांस तेजी से चलना
- बच्चे का शरीर नीला पड़ना
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बचाव के उपाय
- ठंड से बचाव करें
- बच्चों को खुली हवा में न घुमाएं
- गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें
- गर्म व ताजे खाद्य पदार्थों का प्रयोग करें
- दूध में हल्दी डालकर दें
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