रोहतक में पूर्वांचल समाज की आस्था का महापर्व छठ पूजा शुक्रवार सुबह उदीयगामी सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हुआ। पिछले 36 घंटे से निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं व अन्य श्रद्धालुओं ने अपना व्रत खोला। समाज के इस चार दिवसीय लोकप्रिय त्योहार का शुभारंभ नहाय खाय से हुआ था। वीरवार को श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर उनकी पूजा की।
शुक्रवार अल सुबह भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देने घाट पर पहुंचे। शहर में दिल्ली बाईपास स्थित नहर पर बने घाट पर समाज का बड़ा कार्यक्रम हुआ। यही सबसे अधिक कई 50000 से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। इसके अलावा गोकर्ण डेरा हिसार बाईपास, एकता कॉलोनी, सुनारिया चौक, सुनारिया रोड, बोहर नहर, कन्हेली हेड समेत 11 जगह छठ पूजा के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। यहां पूजन की व्यवस्था की गई थी।
कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर में उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ महापर्व का पावन समापन हुआ। श्रद्धालुओं ने सूर्य उदय से पहले ब्रह्मसरोवर के जल में कई घंटों तक खड़े रहकर सूर्य की पहली किरण को अर्घ्य अर्पित किया और छठी मैया का पूजन कर अपना 48 घंटे का निर्जला व्रत खोला।
जींद में शुक्रवार को छठ पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। व्रती ने हांसी ब्रांच नहर के घाट पर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर और पूजा अर्चना करके निर्जल व्रत का समापन किया। पूर्वांचल प्रकोष्ठ के संयोजक संतोष कुमार ने बताया कि छठ पूजा को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। हर साल कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यह छठ का पर्व मनाया जाता है। इस छठ के व्रत को संतान की लंबी आयु, पति के स्वस्थ जीवन और घर-परिवार के सुख-सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है।
उन्होंने बताया कि नहर के घाट पर विभिन्न प्रदेशों से आए लोगों के साथ मिलजुल का यह महापर्व मनाया जाता है। इस व्रत को पूरी शुद्धता, पवित्रता और साफ-सच्चे मन से करता हैं, उसकी सभी मनोकामनाएं छठी मईया पूरी करती हैं। व्रती राजू पाठक, शंकर शाह, चमन शर्मा, राजकुमार ने बताया कि यह महापर्व चार दिनों तक मनाया जाने वाला ये पर्व हिन्दू लोक आस्था से जुड़ा एक बड़ा पर्व है। इसे महापर्व का दर्जा दिया गया है। छठ का व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक है। इस दौरान व्रती 36 घंटे से भी ज्यादा समय के लिए निर्जला व्रत करके छठी मईया और भगवान सूर्य की उपासना करते हैं।
अंतिम दिन सुबह उदयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती अपना व्रत खोलते हैं। वहीं नरवाना में सिरसा ब्रांच नहर के घाट पर शुक्रवार अल सुबह बाहर से आए पूर्वांचल निवासियों की भीड़ होने लगी थी। वीरवार रात से ही श्रद्धालु और व्रती महिलाएं घाटों पर एकत्रित होना शुरू हो गई थी। इस दौरान श्रद्धालु व्रतियों ने परंपरागत गीतों और श्रद्धा से सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी की है। नहर के घाट पर महिला, बुजुर्ग, युवा व छोटे बच्चे बेहद खुश दिखाई दिए और घाट के पास बच्चों ने खूब आतिशबाजी कर अपनी खुशी जाहिर की।
पूर्वांचलवासियों ने शुक्रवार सुबह छठ पूजा के उपलक्ष्य में विभिन्न जगहों पर धार्मिक गतिविधियां आयोजित की। शुक्रवार को छठ व्रतियों ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर उपवास पूरा किया। अर्घ्य देने के लिए व्रती महिलाओं और पुरुषों ने पानी में खड़े रहकर सूर्योदय का इंतजार किया। सूर्योदय होने पर आस्था और श्रद्धा के साथ जल और दूध से सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया। वहीं, महिलाओं ने मंगल गीत भी गाए।
स्थानीय चंपापुरी, रासीवासिया धर्मशाला, गांधी नगर व अग्रसेन धर्मशाला के समीप उत्तरांचल निवासी श्रद्धांलु लालबाबू, चंदन, रणजीत, मनोज, नीरज, विकेश, विक्की व गोलू ने बताया कि यह ऐसा पर्व है जो वैदिक काल से ही चला आ रहा है। सूर्य देवता जो संपूर्ण सृष्टि को ऊर्जा देते हैं उनकी उपासना का महापर्व है। पवित्रता और समरसता के भाव के साथ मानव कल्याण का एक अनूठा पर्व है। छठ मैय्या संतान की रक्षा करती हैं और उनकी पूजा कर सभी ने मिलकर अपने परिवार की खुशहाली की कामना की।