दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल
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दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल में नकलची विद्यार्थियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। 49 विद्यार्थियों को जिस पेपर में नकल करते हुए पकड़ा गया था, उसे रद्द कर दिया गया है। 10 विद्यार्थियों का पूरा सेमेस्टर ही रद्द कर दिया तो 2 विद्यार्थियों पर एक साल का प्रतिबंध लगाया गया है। वायरलेस सिस्टम लगाकर पेपर में नकल करने वाले विद्यार्थी पर 3 साल का प्रतिबंध लगा दिया गया है। वह तीन साल तक यूनिवर्सिटी में नहीं आ सकेगा। वहीं 17 विद्यार्थियों को संदेह का लाभ दिया गया है। उनकी उस पेपर की दोनों कॉपी चेक की जाएंगी, जिसमें उनकी यूएमसी बनाई गई थी।
हर बार यहां 100 से ऊपर जाती है यूएमसी, इस बार कसी नकेल
विवि की परीक्षाएं दिसंबर 2019 में कराई गई थी। उस दौरान कॉलेजों में नकल करने के अलावा उत्तर पुस्तिकाओं में मोबाइल नंबर लिखने वालों की यूएमसी (अनफेयर मींस कैसेज) बना दी गई थी, जिनकी संख्या 89 थी। जहां हर बार यूएमसी की संख्या 100 से ऊपर पहुंचती थी। इस बार परीक्षा के समय ही शिकंजा कसा गया था। विद्यार्थी पकड़े जाने के डर से नकल करने से काफी बचे थे, लेकिन जितने भी विद्यार्थी नकल करते हुए पकड़े गए, उनकी यूएमसी स्टेंडिंग कमेटी के सामने पेशी हुई। जहां विद्यार्थियों ने अपना पक्ष रखा और उसके बाद स्टेंडिंग कमेटी ने सजा सुनाई। 49 विद्यार्थियों के वे पेपर कैंसिल कर दिए, जिसमें वह नकल करते हुए मिले थे और वह पेपर उनको अगले सेमेस्टर में दोबारा देना होगा। जबकि 10 विद्यार्थियों का सेमेस्टर कैंसिल करने से उनको छह महीने ज्यादा पढ़ाई करके दोबारा पेपर देने होंगे। 17 विद्यार्थियों को संदेह का लाभ दिया गया है। उनकी दोनों कॉपी चेक करके नंबर दिए जाएंगे। उनकी जिस कॉपी के साथ यूएमसी बनाई गई थी और यूएमसी बनाने के बाद दी गई दूसरी कॉपी भी जांची जाएगी। उसके बाद उक्त 17 विद्यार्थियों का रिजल्ट जारी कर किया जाएगा।
वायरलेस सिस्टम से नकल करने वाले पर तीन साल का प्रतिबंध
यूनिवर्सिटी के एमबीए मैनेजमेंट एंड ह्यूमेनिटीज के एक छात्र ने अपनी कमीज के कॉलर में वायरलेस सिस्टम लगाया हुआ था और कॉलर की ऊपर से सिलाई की हुई थी, ताकि चेकिंग करते हुए किसी को उसके बारे में पता न लग सके। उस वायरलेस सिस्टम को ईयर फोन को जोड़कर अपने कान में अंदर घुसाया हुआ था। वह कान के इतने अंदर था कि किसी को आसानी से दिखाई नहीं देता था और उसे काफी खींचतान के बाद चुंबक के सहारे ही बाहर निकाला जा सके। वह छात्र इस तरह नकल करके 6 पेपर कर चुका था और किसी की पकड़ में नहीं आ सका था। उसकी पहले ही लगभग 8 पेपर में सप्लीमेंटरी थी और वह लगातार नकल कर रहा था। अन्य विद्यार्थियों से प्रोफेसर को इस बारे में पता लगा तो उसे पकड़ लिया गया था। अब उस छात्र पर तीन साल का प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा दो अन्य छात्रों पर एक-एक साल का प्रतिबंध नकल करने के कारण लगाया गया है।
यूनिवर्सिटी की यूएमसी स्टेंडिंग कमेटी ने सुनवाई के बाद विद्यार्थियों को सजा सुनाई है। जिसमें किसी पर तीन साल का प्रतिबंध लगा है तो कोई एक साल तक परीक्षा नहीं दे सकेगा। इसके अलावा पेपर व सेमेस्टर कैंसिल की कार्रवाई भी हुई है। इस तरह विद्यार्थियों को साफतौर पर बताया गया है कि कोई भी नकल करेगा तो उसपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. एमएस धनखड़, परीक्षा नियंत्रक मुरथल यूनिवर्सिटी।