जिले के बरोदा हलके के गांव बुटाना कुंडू ने बेटियां बचाने में मिसाल कायम की और एक साल के अंदर दोगुना से ज्यादा लिंगानुपात हुआ। जहां वर्ष 2019 में बुटाना कुंडू का लिंगानुपात 594 था, वहीं अब वर्ष 2020 में यह बढ़कर 1396 पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी की गई सूची में लिंगानुपात के मामले में बुटाना कुंडू जिले का सर्वश्रेष्ठ गांव रहा। विभाग की ओर से वर्ष 2020 में मैट्रिक में पहले तीन स्थान प्राप्त करने वाली छात्राओं को नकद राशि देकर सम्मानित किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग व महिला एवं बाल विकास विभाग ने कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए जागरुकता अभियान चलाया हुआ है। इसका असर भी दिखने लगा है। जिले के कई गांवों में लिंगानुपात में काफी उछाल आया है। जहां वर्ष 2019 में गांव बुटाना कुंडू का लिंगानुपात 594, राठधना का 1062, बड़ी का 780, खेड़ी गुज्जर का 635 व नांगल कलां का 887 रहा, वहीं इस बार इन पांचों गांवों में सबसे ज्यादा बेटियों ने जन्म लिया और गांव के लिंगानुपात में भी काफी सुधार आया। इन पांचों गांवों ने इस बार जिले के सभी गांवों को पछाड़ते हुए 1050 से ज्यादा लिंगानुपात आने पर मिसाल कायम की है।
लिंगानुपात में पांच हजार जनसंख्या वाले गांवों को शामिल किया
स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर वर्ष जिले का लिंगानुपात जारी किया जाता है। इस दौरान लिंगानुपात में बेहतर मिसाल पेश करने वाले पांच गांवों को शामिल किया गया है। लिंगानुपात में पांच हजार जनसंख्या वाले गांवों को शामिल किया जाता है। जिनमें देखा गया कि 2020 में राठधना, बुटाना कुंडू, बड़ी, खेड़ी गुज्जर व नांगल कलां का लिंगानुपात सबसे बेहतर रहा है, जबकि उससे पहले इनका लिंगानुपात काफी कम था।
किस गांवों में कितने बच्चें जन्मे
वर्ष 2020 में बुटाना कुंडू में 48 बेटों का जन्म हुआ तो 67 बेटियों ने जन्म लिया। राठधना में 51 बेटों व 60 बेटियों ने जन्म लिया। बड़ी में 70 बेटों ने और 81 बेटियों ने जन्म लिया। खेड़ी गुज्जर में 59 बेटों और 65 बेटियों ने जन्म लिया। नांगल कलां में 84 बेटों और 65 बेटियों ने जन्म लिया। गांव बुटाना कुंडू का लिंगानुपात 1396, राठधना का 1176, बड़ी का 1157, खेड़ी गुज्जर का 1102 व नांगल कलां का 1071 तक पहुंचा।
विभाग की ओर से लगातार अल्ट्रासाउंड सेंटरों व गर्भपात कराने वालों के यहां छापा मारा जा रहा है, जिसकी बदौलत जिले में लिंगानुपात सुधर रहा है। अगर समाज के लोग कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ खड़े हों तो हालात ज्यादा सुधर सकते हैं। -डॉ. आदर्श शर्मा, पीएनडीटी प्रभारी स्वास्थ्य विभाग