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बीएसएफ जवान का शव रखकर लाया गया वाहन थाने में खड़ा रहा, परिजनों ने 17 घंटे बाद लिया पार्थिव शरीर, राजकीय सम्मान से हुआ अंतिम संस

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बीएसएफ जवान सुरेश कुमार को श्रद्धासुमन अर्पित करते एसडीएम स्वप्निल रविंद्र पाटिल। - फोटो : Sonipat
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गन्नौर । गांव आहुलाना के बीएसएफ जवान की मौत के मामले में गांव के बुजुर्गों व अधिकारियों के समझाने के बाद आखिरकार परिजन उनके शव का अंतिम संस्कार करने को तैयार हो गए। शव के गांव में पहुंचने के करीब 17 घंटे अंतिम संस्कार किया जा सका। इस दौरान देर रात तक परिजनों के नहीं मानने पर रात 11 बजे शव लेकर आए वाहन को गन्नौर थाना में खड़ा कर दिया गया था। परिजन सुरेश कुमार को शहीद का दर्ज देने की मांग कर रहे थे। सुबह नौ बजे थाने में जाकर शव को गांव में लाया गया, जहां उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
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गांव आहुलाना के रहने सुरेश कुमार बीएसएफ की 157 बटालियन में छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में बतौर हेड कांस्टेबल तैनात थे। नक्सल विरोधी अभियान से लौटने के बाद शिविर से लगभग दो सौ मीटर पहले सुरेश कुमार का शव मिला था। उन्हें गोली लगी थी। बताया गया था कि उन्होंने आत्महत्या की है। रविवार को शाम के समय जब बीएसएफ कर्मी सुरेश का शव लेकर गांव में पहुंचे तो परिजनों ने आत्महत्या करने की बात को नकारते हुए उन्हें शहीद का दर्जा देने की मांग करते हुए शव लेने से मना कर दिया था। रात करीब 11 बजे उनके शव को लेकर आए वाहन को गन्नौर थाना में खड़ा कर दिया गया था। गन्नौर थाना में सुरेश कुमार का शव 11 घंटे तक बीएसएफ जवानों की निगरानी में रहा। सोमवार सुबह जब गांव के बुजुर्गों व अधिकारियों ने परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए मनाया तो परिजन उनकी बात से सहमत हो गए। बुजुर्गों ने कहा कि गांव के सपूत के शव का अपमान करना ठीक नहीं है। उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए। वहीं अधिकारियों ने भी परिजनों को आश्वासन दिया कि मामले की जांच की जा रही है। निष्पक्ष जांच के बाद जो भी न्यायोचित होगा वह कार्रवाई की जाएगी। इस पर परिजन सुरेश कुमार के शव का अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। परिजनों से सहमति मिलने के बाद बीएसएफ के जवान सुबह करीब 9 बजे शव को लेकर आहुलाना गांव के लिए रवाना हुए। शव के गांव में पहुंचते ही परिजनों व ग्रामीणों ने सम्मान के साथ शव को गाड़ी से उतरवाया। सुरेश कुमार शव को देखते ही परिजन विलाप करने लगे। इसके बाद सुरेश कुमार के शव को गांव के शमशान घाट पर ले जाया गया जहां बीएसएफ के जवानों ने इंस्पेक्टर मनोज कुमार के नेतृत्व में राजकीय सम्मान कि साथ सुरेश कुमार को श्रद्धांजली दी। इस दौरान एसडीएम गन्नौर स्वप्निल रविंद्र पाटिल, नायब तहसीलदार राजबीर दहिया, कार्यकारी एसईपीओ जयभगवान, गन्नौर थाना प्रभारी बदन सिंह, खुबडू चौकी प्रभारी रमेश कुमार ने भी सुरेश कुमार को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
शहीद का दर्जा दिलाने के लिए लड़ाई लड़ेंगे
सुरेश कुमार की पत्नी सुदेश देवी ने कहा कि उनके पति बहादुर थे। वह आत्महत्या नहीं कर सकते। प्रशासन की तरफ से भी आश्वासन मिला है और वह भी अपने पति को शहीद का दर्जा दिलवाने के लिए लड़ाई जारी रखेंगी।

बीएसएफ जवान के शव को गाड़ी से उतारते ग्रामीण।- फोटो : Sonipat

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