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जंग में संगः बरसों पुराने विवाद किनारे, पंजाब-हरियाणा और यूपी के किसानों में दिख रहा भाईचारा

Sun, 06 Dec 2020 05:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा अंकित चौहान, सोनीपत

सार

  • पंजाब के साथ पानी को लेकर 45 साल से विवाद होने के बाद भी कृषि कानूनों के खिलाफ दिखी किसानों में एकजुटता
  • हरियाणा संग यमुना की जमीन को लेकर यूपी के किसानों का 50 साल से विवाद होने के बावजूद आंदोलन में दिख रहा भाईचारा
  • तीनों प्रदेशों के किसानों का केवल एक ही मकसद, एकजुट रहकर कृषि कानूनों को रद्द कराने के बाद ही वापस जाना
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विरोध में साथ... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए किसान नेशनल हाईवे 44 के सिंघु बॉर्डर पर बैठे हुए है और उनके समर्थन में लगातार किसान पहुंच रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि 50 साल पुराने विवाद तक किनारे करके पहली बार पंजाब-हरियाणा-यूपी के इतने ज्यादा किसान एक साथ किसी आंदोलन में एकत्र हुए हैं जिससे वहां पंजाब-हरियाणा-यूपी के किसानों के बीच बड़ा भाईचारा दिख रहा है। 
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पहले उनके प्रदेशों के बीच कोई विवाद रहा है या नहीं, उनको इससे कोई मतलब नहीं है। उनका केवल एक ही मकसद है और वह एकजुट रहकर भाईचारा कायम रखते हुए कृषि कानूनों को रद्द कराना है। तीनों प्रदेशों के किसान साफ कहते हैं कि किसी तरह के विवाद से उनको कुछ नहीं लेना है। उनके बीच भाईचारा ऐसे ही बना रहेगा, क्योंकि उनको पता है कि भाईचारा ही सबसे बड़ी ताकत है, जिससे वह सरकार से अपनी मांग मनवा सकते है। 

45 साल पुराना विवाद पीछे छोड़ पंजाब-हरियाणा के बीच सबसे बड़ा भाईचारा
पंजाब का वर्ष 1966 में बंटवारा कर हरियाणा अलग प्रदेश बनने के बाद ही पानी का विवाद शुरू हो गया था। उसी समय से पानी के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा है। इस पर काफी राजनीति भी होती रही है तो आंदोलन भी इसको लेकर काफी हुए। राजनीतिक पार्टियों ने आंदोलन खड़े करके पंजाब के रास्ते तक बंद करा दिए थे। इस तरह से काफी विवाद हुए, लेकिन कृषि कानून रद्द करने के लिए आंदोलन की शुरुआत करने वाले पंजाब के किसानों के साथ सबसे पहले हरियाणा के किसान ही भाईचारा निभाकर खड़े हुए। 
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सिंघु बॉर्डर पर दोनों प्रदेशों के किसानों के बीच ऐसा भाईचारा दिख रहा है कि पंजाब के किसानों के लिए हर जरूरत का सामान हरियाणा के किसान लेकर आ रहे हैं। पंजाब के किसानों के साथ बैठकर ही खाना खाते हैं और उनके साथ ही दिनभर दुख दर्द से लेकर खुशी की बातचीत साझा करते हैं। 

हरियाणा-यूपी के किसानों में भाईचारा, पंजाब संग भी एकजुटता 
हरियाणा और यूपी के यमुना के किनारे बसे 50 से ज्यादा गांवों के बीच जमीन को लेकर करीब वर्ष 1970 से विवाद चल रहा है। यह विवाद निपटाने के लिए केंद्र सरकार ने तत्कालीन कृषि मंत्री उमाशंकर दीक्षित की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया और दीक्षित अवॉर्ड के तहत दोनों प्रदेश की जमीन पर पिलर लगवाए गए। यह अवॉर्ड 1974-75 में किया गया और उस समय यमुना की धार को आधार मानकर सीमांकन कर दिया था। उसके बाद भी विवाद नहीं निपट सका। 

लेकिन अब कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन हुआ तो 50 साल पुराना विवाद भी किनारे करके यूपी के काफी किसान सिंघु बॉर्डर पर हरियाणा के किसानों संग भाईचारा दिखाते हुए पहुंच रहे हैं। उनको भी इससे कोई मतलब नहीं है कि पहले उनके बीच क्या था, बल्कि अब वह एकजुट रहकर कृषि कानून रद्द कराना चाहते हैं। इनका पंजाब के किसानों के साथ भी पूरा भाईचारा चल रहा है। यह किसी भी तरह से भाईचारा नहीं टूटने देना चाहते हैं। 

बोले किसान...
पहले क्या विवाद चल रहा था, इससे हमें कुछ नहीं लेना है। इस समय हरियाणा, पंजाब, यूपी सभी किसानों में भाईचारा है और ऐसा भाईचारा है कि पूरा दिन साथ में रहते हैं। एक साथ बैठकर खाते हैं। जिस तरह का भाईचारा अब बना है, इससे सरकार को हमारी मांग माननी पड़ेगी। जबतक मांग पूरी नहीं होगी, तब तक सड़क से कोई नहीं हटेगा। 
- नाहर सिंह, गोहाना हरियाणा

कृषि कानूनों के विरोध में यहां केवल पंजाब का किसान नहीं है, बल्कि हरियाणा के किसान भी खूब पहुंच रहे हैं तो यूपी के किसान भी आ रहे हैं। किसानों का भाईचारा बढ़ता जा रहा है और किसानों में आपसी प्रेम खूब है। अब पूरे देश का किसान एकजुट हो रहा है और सरकार को किसानों की मांग माननी पड़ेगी। क्योंकि किसानों की मांग नहीं मानी जाएगी तो ऐसे ही नेशनल हाईवे पर किसान रहेंगे। 
- अवतार सिंह, मोहाली पंजाब

इस आंदोलन में किसानों का भाईचारा दिख रहा है और हर किसी की कृषि कानून को लेकर ही लड़ाई है। जिसके लिए पंजाब, हरियाणा, यूपी, राजस्थान, उत्तराखंड सभी जगह के किसान एकजुट हो रहे हैं। किसानों का ऐसा आंदोलन पहले कभी नहीं हुआ, जिसमें सरकार के खिलाफ इतने ज्यादा किसान सड़कों पर उतरा हो। 
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- गुरनाम सिंह चढूनी, सदस्य अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति
 
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