हरियाणा-उत्तर प्रदेश में जारी सीमा विवाद के बीच फर्जी सूची बनाकर शामलात जमीन पर अपना हक जताने के आरोप लगे हैं। आरोप है कि कुछ लोग सोनीपत और बागपत प्रशासन को गुमराह कर जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। सोनीपत के गांव बड़ौली के साथ-साथ लगते यूपी के जिला बागपत के गांव निनाना फैजपुर के 27 लोगों ने यमुना में कटाव के कारण सोनीपत की सीमा में आई 153 एकड़ भूमि पर अपना हक जताया है।
वर्ष 1974 में सीमा विवाद को लेकर हुए दीक्षित अवार्ड में यमुना नदी को दोनों प्रदेशों की सीमा मान लिया गया था। इसके तहत गांव निनाना की करीब 153 एकड़ शामलात भूमि सोनीपत के गांव बड़ौली में आ गई थी। जमीन की चकबंदी भी हो गई थी, लेकिन 27 लोगों के इस जमीन पर हक जताया तो इसकी सूची सोनीपत प्रशासन को भेजी गई।
यहां पर ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। जिसके चलते इसे सत्यापित करने के लिए यूपी के बागपत प्रशासन को भेजा गया। वहां के सर्वे विभाग ने रिकॉर्ड न होने के बावजूद सूची को सत्यापित कर दिया। इस कार्रवाई पर निनाना के ही वर्तमान प्रधान व कुछ ग्रामीणों ने जांच की मांग की है।
उन्होंने इसे लेकर सोनीपत प्रशासन को पत्र लिखा है। उनका आरोप है कि यह सूची फर्जी है। दीक्षित अवार्ड के तहत भूमि समझौते को लेकर जो आंकड़े सामने आए थे, उनके अनुसार गांव की 700 बीघा से ज्यादा शामलात भूमि सोनीपत के गांव बड़ौली की सीमा में आ गई थी। इस भूमि को हरियाणा में शामलात भूमि के तहत रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है।
वर्ष 2015 के बाद अचानक एक सूची तैयार की गई, जिसमें गांव निनाना के 27 लोगों के नाम दिए गए थे। यह सूची हरियाणा में सोनीपत प्रशासन के पास भेजी गई। सूची को चंडीगढ़ मुख्यालय भेजकर रिकॉर्ड खंगाला गया तो कोई साक्ष्य नहीं मिला। ऐसे में सूची को सत्यापित करने के लिए सोनीपत प्रशासन की ओर से बागपत प्रशासन के पास भेजा गया।
वहां से सर्वे विभाग ने सूची को सत्यापित कर वापस भेज दिया। अब इस पर सवाल उठ रहे हैं। इसकी जांच की मांग की गई है। सोनीपत प्रशासन ने सूची को लेकर कहा है कि यह जमीन पहले से हुई चकबंदी के अनुसार ही रहेगी। शामलात जमीन में अब कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा।
क्या है दीक्षित अवार्ड
1974 में केंद्र सरकार ने दोनों प्रदेशों के किसानों की सीमा विवाद को समाप्त करने के लिए दीक्षित अवार्ड घोषित किया था। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज दीक्षित के नाम पर इसे दीक्षित अवार्ड का नाम दिया गया। इस अवार्ड के तहत यमुना नदी को ही दोनों प्रदेशों की सीमा मान लिया था।
दीक्षित अवार्ड के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जो चकबंदी हुई थी, उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। उस दौरान हुई चकबंदी के अनुसार यह जमीन शामलात में आती है तो अब उसे शामलात की श्रेणी में ही रखा जाएगा।
-हरिओम अत्री, डीआरओ, सोनीपत।