दान के रक्त से बचती है दूसरों की जान
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हार्टअटैक से लोगों की जान जाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। युवा भी इससे नहीं बच रहे हैं। हार्टअटैक की चपेट में ज्यादा लोगों को आता देखकर ही एक शोध किया गया। शोध में सामने आया कि शरीर में खून की अधिकता होने से खून का घनत्व बढ़ जाता है और यही हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण माना गया है। इसलिए रक्तदान एक ऐसा विकल्प है जो खून का घनत्व बढ़ने से रोकता है और साथ ही हार्ट अटैक के खतरे को भी कम करता है। यह शोध किया है दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. टंकेश्वर कुमार ने। उन्होंने हार्टअटैक के कारण को फिजिक्स के साथ भी जोड़ा है। यह शोध पत्र प्रकाशित होने पर इसे काफी सराहा गया है। लोगों को जागरूक करने के लिए इसका प्रसारण सरकारी चैनलों पर कराया गया है।
घनत्व बढ़ने पर नसों में थमने लगता है खून का प्रवाह
वीसी प्रो. टंकेश्वर कुमार ने अपने शोध में सबसे पहले यह देखा कि आखिर किन-किन कारणों से खून का प्रवाह नसों में रुकता है। सबसे बड़ा कारण शरीर में खून की अधिकता और उसका बढ़ता घनत्व पाया गया। खून का घनत्व बढ़ते-बढ़ते एक समय ऐसा आ जाता है कि वह ठोस होने लगता है और उसका प्रवाह नसों में बंद होने लगता है। वहीं, दूसरा कारण यह निकला कि घनत्व थोड़ा बढ़ने के बाद भी खून का प्रवाह होता रहता है, लेकिन वह कई बार नसों में पहुंचकर जमा होने लगता है। उससे शरीर की नसें सिकुड़ने के साथ ही ब्लाक होने लगती हैं। एक समय ऐसा आता है जब नसें पूरी तरह बंद हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में हार्ट अटैक आने से इंसान की मौत तक हो जाती है।
खून दान करने के साथ ही नसों का लचीलापन बचाएगा
शरीर में खून की अधिकता होने के कारण ही उसका घनत्व बढ़ता है। इसलिए समय-समय पर खून को दान करते रहना चाहिए। इसी तरह नसों को लचीला बनाने के लिए व्यायाम बहुत जरूरी है। नसों में लचीलापन होगा तो खून के प्रवाह में कोई परेशानी नहीं होगी। वहीं खून का कुछ घनत्व बढ़ भी जाता है तो नसों में लचीलापन होने के कारण उसका प्रवाह सामान्य बना रहता है। लेकिन इसके लिए व्यायाम नियमित होना चाहिए, जिससे नसों का लचीलापन बना रहे।
इस समय हार्टअटैक की समस्या सबसे ज्यादा आ रही है। इस समस्या से पहले ही संभला जा सकता है। इसका केवल एक ही कारण है और वह खून का प्रवाह थमना है। खून का प्रवाह किस कारणों से रुकता है और उसे कैसे सामान्य रखा जा सकता है, इस पर ही फिजिक्स से जोड़ते हुए एक शोध किया गया। इसके जरिए लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। प्रो. टंकेश्वर कुमार, वीसी दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल