सोनीपत। नगर निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए शहर की राजनीति में अपना दबदबा कायम कर लिया है। भाजपा ने 22 में से 17 वार्डों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
कांग्रेस केवल 5 वार्डों में ही जीत दर्ज कर सकी। चुनाव परिणामों ने यह साफ कर दिया कि इस बार शहर की जनता ने भाजपा के पक्ष में खुलकर मतदान किया।
वर्ष 2020 के चुनाव परिणामों की तुलना करें तो उस समय कांग्रेस ने 10 वार्डों में जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा के खाते में 9 सीटें गई थीं और एक सीट निर्दलीय प्रत्शशी ने जीती थी। इस बार पांच वर्षों में राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई। भाजपा ने कांग्रेस के कई गढ़ों में सेंध लगाते बड़ी बढ़त बना ली।
चुनाव में कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका यह रहा कि वर्ष 2020 में जीत दर्ज करने वाले पार्षद इस बार अपनी सीट नहीं बचा सके। कई नेताओं ने पार्टी बदल ली, कुछ के वार्ड आरक्षित हो गए, जबकि कई नेताओं के टिकट काट दिए गए। टिकट न मिलने से नाराज कुछ नेता निर्दलीय मैदान में भी उतरे, लेकिन जनता ने उन्हें स्वीकार नहीं किया।
वार्ड-8 बना चुनाव का सबसे चर्चित रण : वार्ड-8 सबसे चर्चित और हाईप्रोफाइल सीट रही। यहां भाजपा ने लगातार दूसरी बार भगवा लहराते हुए जीत अपने नाम की। भाजपा प्रत्याशी कुनाल कौशिक ने महज 22 वर्ष की उम्र में 341 मतों से जीत हासिल कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
यह सीट इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि भाजपा के पूर्व प्रत्याशी पुनित राई का टिकट कट गया था। टिकट कटने के बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरकर भाजपा प्रदेश नेतृत्व पर रिश्तेदारी के आधार पर टिकट वितरण का आरोप लगाया था।
इसके चलते वार्ड-8 पूरे चुनाव के दौरान राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना रहा। निर्दलीय मैदान में उतरे पुनित राई तीसरे स्थान पर रहे।
दीपमाला के पति पहले से जिला पार्षद : कांग्रेस का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा, लेकिन वार्ड 21 से जीत दर्ज करने वाली दीपमाला प्रमुख महिला विजेता बनकर उभरी हैं। दीपमाला की जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है कि क्योंकि उनके पति संजय बड़वासनी पहले से जिला परिषद वार्ड-13 से जिला पार्षद हैं।