झज्जर। पुलिस उपायुक्त मुख्यालय फैसल खान ने कहा कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स भारतीय युवाओं को ठगने, अपने जाल में फंसाने और संवेदनशील जानकारियां चुराने के लिए नित नए डिजिटल पैंतरे अपना रहे हैं।
पाकिस्तान के एजेंट अक्सर धर्म और मजहब का सहारा लेकर युवाओं का माइंडवॉश (ब्रेनवॉश) करते हैं। उन्हें धार्मिक रूप से भड़काकर, झूठी कट्टरपंथी बातों में उलझाकर और उकसाकर अपने ही देश के खिलाफ जासूसी करने के लिए तैयार किया जाता है।
इसके अलावा +92 (पाकिस्तान का कंट्री कोड) या अन्य अंतरराष्ट्रीय नंबरों से युवाओं को कॉल्स और व्हाट्सएप मैसेज आ रहे हैं। इनमें केबीसी, लॉटरी, कार जीतने या भारी कैश प्राइज का लालच दिया जाता है। इनाम की रकम क्लेम करने के नाम पर प्रोसेसिंग फीस मांगी जाती है या फर्जी लिंक पर क्लिक करवाकर मोबाइल हैक कर लिया जाता है।
इसी प्रकार संदिग्ध एजेंट फेक प्रोफाइल (खासकर महिलाओं के नाम से) बनाकर फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम पर दोस्ती करते हैं। धीरे-धीरे भावनात्मक या अश्लील बातचीत के जरिये युवाओं को ब्लैकमेल करने लायक सामग्री जुटा लेते हैं। युवाओं को वर्क-फ्रॉम-होम, डेटा एंट्री, या टेलीग्राम टास्क के नाम पर पैसों का लालच दिया जाता है। बाद में उनसे छोटी-मोटी जासूसी, फोटो या लोकेशन शेयर करने को कहा जाता है। अवैध ऐप्स के जरिये युवाओं को कर्ज या सट्टेबाजी के जाल में फंसाया जाता है और बाद में ब्लैकमेल किया जाता है।