सोनीपत। द सोनीपत को-ऑपरेटिव बैंक की चेयरपर्सन लोकेश देवी के खिलाफ एक बार फिर से निदेशकों ने मोर्चा खोला और अविश्वास प्रस्ताव के लिए अधिकारियों को पत्र सौंप दिया। अविश्वास प्रस्ताव के लिए बोर्ड की बैठक शुक्रवार को रखी गई, लेकिन उससे पहले ही चेयरपर्सन ने वीरवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। चेयरपर्सन के कार्यकाल का अभी एक साल बचा था। चेयरपर्सन के खिलाफ छह निदेशक खड़े हो गए थे जो इस्तीफा देने के बाद भी शुक्रवार को बैठक करेंगे और उसमें अविश्वास प्रस्ताव पास करने की बात कह रहे हैं। जबकि चेयरपर्सन लोकेश देवी ने अपनी मर्जी से बिना किसी दबाव के इस्तीफा देने की बात कही है।
द सोनीपत को-ऑपरेटिव बैंक के दस निदेशक थे, जिनमें से दो डायरेक्टर राज कुंडू व रामेश्वर का निधन हो गया था। उसके बाद निदेशकों ने चेयरपर्सन लोकेश देवी के खिलाफ कुर्सी से हटाने का अभियान शुरू कर दिया था और उनके खिलाफ एक साल पहले अविश्वास प्रस्ताव पास करके चेयरपर्सन से हटा दिया था। जिसके खिलाफ लोकेश देवी सुप्रीम कोर्ट में चली गईं और उनको वहां से दोबारा चेयरपर्सन बनाने के आदेश पारित किए गए। उसके बाद दोबारा से चेयरपर्सन के खिलाफ निदेशक बगावती हो गए और छह डायरेक्टर बलबीर सिंह, सतपाल दहिया, शमशेर दहिया, राजेश ढुल, सतीश धनखड़ व वीरेंद्र दूहन ने चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए अधिकारियों को पत्र सौंप दिया। इस पर रजिस्ट्रार की ओर से रोहतक के डिप्टी रजिस्ट्रार महाबीर शर्मा को बैठक कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इनकी देखरेख में 17 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक में चर्चा होनी थी। लेकिन इस अविश्वास प्रस्ताव से पहले ही चेयरपर्सन लोकेश देवी ने पद से इस्तीफा दे दिया। चेयरपर्सन लोकेश देवी का कहना है कि उन्होंने काफी समय तक पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य किया है और अब वह अपनी मर्जी से इस्तीफा दे रही हैं। वहीं निदेशक वीरेंद्र दूहन ने बताया कि निदेशकों की बैठक शुक्रवार को जरूर होगी और उसमें अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। उसके बाद जल्द ही सभी निदेशक मिलकर चेयरमैन का चुनाव करेंगे।