सोनीपत। आयुष्मान भारत योजना को सरकार ने इसलिए शुरू किया था, जिससे गरीबों को बीमार होने पर उपचार के लिए भटकना नहीं पड़े। उनको सरकारी के साथ ही प्राइवेट हॉस्पिटल में आसानी से उपचार मिल सके। लेकिन सरकारी अफसरों के प्रचार-प्रसार नहीं कराने के कारण आज भी अधिकतर लोगों को योजना के बारे में जानकारी नहीं है और इस योजना के पात्रों की सूची में अपना नाम तक नहीं देखा है। उनको जानकारी के अभाव में योजना का लाभ ही नहीं मिल रहा है तो किसी को समस्याओं के समाधान के लिए चक्कर कटाए जा रहे हैं। वहीं इसमें एक बड़ी समस्या यह भी सामने आ रही है कि कार्ड बनने के बाद भी कुछ प्राइवेट अस्पताल मनमानी पर उतरे हुए हैं और वह कार्ड धारकों को गलत जानकारी देकर रुपये ऐंठने के चक्कर में लगे रहते हैं।
इस आधार पर ऐसे बनता है कार्ड
आयुष्मान भारत योजना सितंबर 2018 में शुरू हुई थी। इसके लिए 2011 के सामाजिक व आर्थिक सर्वे के आधार पर लिस्ट तैयार की गई थी और उसके आधार पर ही योजना का लाभ दिया जा रहा है। यह लिस्ट जिले के सरकारी अस्पतालों के साथ ही सभी सीएचसी में मौजूद है, जहां 2011 में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले जाकर अपना नाम लिस्ट में देख सकते हैं। कोई 2011 के बाद गरीबी रेखा में शामिल हुआ है तो उसको इसका लाभ नहीं मिलेगा। जिन परिवारों का लिस्ट में नाम दर्ज है, उनके अस्पताल व सीएचसी में जाने पर आधार कार्ड के साथ ही राशन कार्ड की जांच करके योजना का कार्ड बनाया जाता है। जिससे उसके परिवार को बीमारी में आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक के उपचार का लाभ मिल सके।
इस तरह होता है कार्डधारक का बीमार होने पर उपचार
आयुष्मान भारत योजना का लाभार्थी अस्पताल में एडमिट होने के लिए कोई चार्ज नहीं देना होता है। अस्पताल में दाखिल होने से लेकर इलाज तक का सारा खर्च इस योजना में कवर किया जाता है। पैनल में शामिल हर अस्पताल में एक आरोग्य मित्र होना चाहिए। वह मरीज को अस्पताल की सुविधाएं दिलाने में मदद करे। अस्पताल में एक हेल्प डेस्क भी होना चाहिए जो दस्तावेज चेक करने, स्कीम में नामांकन के लिए वेरिफिकेशन में मदद करे। आयुष्मान भारत योजना में अधिकतर बीमारी के लिए चिकित्सा और अस्पताल में दाखिल होने का खर्च कवर है। आयुष्मान भारत योजना में 1354 पैकेज शामिल हैं। इसमें कोरोनरी बायपास, घुटना बदलना और स्टंट डालने जैसे इलाज भी शामिल हैं।
किसी का नाम गलत तो ठीक कराने को काट रहे चक्कर
ऐसे भी काफी परिवार है, जिनके साथ यह समस्या आ रही है कि उनके परिवार के सदस्यों के नाम लिस्ट में गलत है। उनका शुरूआत में लिस्ट के आधार पर कार्ड बना दिया गया है और जब नाम गलत देखा गया तो उसको ठीक कराने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। उनको चक्कर काटने के बाद भी नाम ठीक नहीं किया जा रहा है। लेकिन अगर किसी के कार्ड में सदस्य का नाम गलत दर्ज हो गया है तो वह उसे ठीक करा सकता है। उसके लिए कोई भी एक ऐसा कागज आधार कार्ड, राशन कार्ड आदि अस्पताल में दिखाना होगा, जिससे यह साफ होता है कि उसका सही नाम यह है और कार्ड में दर्ज गलत नाम उसका है।
आरोग्य मित्र से लें मदद
नागरिक अस्पताल सोनीपत, गोहाना, मेडिकल कालेज खानपुर कलां के साथ ही प्राइवेट हॉस्पिटलों में योजना के तहत आरोग्य मित्र बैठे हुए हैं। किसी को कोई समस्या है, किसी को कार्ड में नाम ठीक कराना है और अन्य किसी तरह की जानकारी व मदद लेनी है तो इन आरोग्य मित्र के पास जाकर मदद ले सकते है। किसी को कोई समस्या नहीं होने दी जाएगी और उनका समाधान किया जाएगा।
-डॉ. जयकिशोर, नोडल अधिकारी आयुष्मान भारत योजना