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जिले में औसतन 6 एमएम बारिश, बूंदाबांदी से फसलों को फायदा

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सोनीपत में रेलवे स्टेशन के पास बूंदाबांदी के बीच गुजरती युवतियां। - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। जिले में पश्चिमी विक्षोभ के असर के चलते रातभर रुक-रुककर बारिश होती रही। मंगलवार सुबह हुई बूंदाबांदी के बाद धूप निकल आई, लेकिन देर शाम फिर से बूंदाबांदी शुरू हो गई। बारिश गेहूं के साथ ही अन्य फसलों के लिए भी फायदेमंद बताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को भी आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। इसके बाद पश्चिमी विक्षोभ का असर समाप्त हो जाएगा और दिन के अधिकतम तापमान में हल्की वृद्धि होनी शुरू हो जाएगी। वर्ष 2012-13 के बाद जनवरी में इतनी बारिश दर्ज की गई है।
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सोमवार सुबह से ही पश्चिमी विक्षोभ की वजह से दिल्ली-एनसीआर में बादल मंडराने लगे थे। सोमवार को दिन में हल्की बूंदाबांदी भी हुई थी, परंतु रात के समय कई क्षेत्रों में बारिश हुई। बारिश का दौर मंगलवार सुबह करीब 9 बजे तक रुक-रुक चलता रहा। उसके बाद मंगलवार देर शाम साढ़े सात बजे फिर से बूंदाबांदी हुई। जिले में सोनीपत में सुबह आठ बजे तक 4 एमएम बरसात दर्ज की गई। वहीं गन्नौर में 6 एमएम, गोहाना 7 एमएम व खरखौदा 6 एमएम और औसतन 6 एमएम बारिश दर्ज की गई। बारिश की वजह से दिन का न्यूनतम तापमान 11 डिग्री और अधिकतम तापमान 18 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार सप्ताह के अंत तक दिन का न्यूनतम तापमान 6 से 8 डिग्री के आसपास बना रह सकता है।
गेहूं की फसल को पहुंचा फायदा
बारिश से रबी की फसलों को फायदा पहुंचा है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार गेहूं की फसल को बारिश से अधिक फायदा हुआ है। बरसात की वजह से किसानों का गेहूं की सिंचाई का खर्च कम हो गया है। जिले में करीब 1 लाख 40 हजार हेक्टेयर भूमि में गेहूं की बिजाई की गई है। तापमान में गिरावट आने से भी गेहूं सहित रबी की कई फसलों को फायदा होगा। हालांकि ठंड की वजह से कई प्रकार की सब्जियों की बढ़वार बेहतर नहीं हो पा रही है।
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वर्ष 2012-13 के बाद इस वर्ष हुई इतनी बारिश
जिले में वर्ष 2012 व 2013 के बाद इस वर्ष इतनी अधिक बारिश दर्ज की गई है। दिसंबर 2012 व जनवरी 2013 के बाद इस वर्ष अच्छी बारिश रिकार्ड की गई है।
पश्चिमी विक्षोभ की वजह से जिले में औसतन करीब 6 एमएम बरसात दर्ज की गई है। बरसात से कृषि क्षेत्र में कोई नुकसान नहीं हुआ है। गेहूं की फसल को फायदा पहुंचा है। किसानों को मौसम के मिजाज के बारे में लगातार जागरूक किया जा रहा है। - डा. अनिल सहरावत, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत।
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