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Sonipat News: अपनी बगिया के 55 किस्म के पौधों से बुकें बना भेंट करती हैं आशा

Mon, 19 Jan 2026 12:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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अपनी बगिया में बेटे की तरह पाले गए फूलदार पौधों को देखकर हर्षित हो रहीं आशा रानी। स्वयं
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गोहाना। शौक को अगर धैर्य और अनुशासन का सहारा मिल जाए तो वह मिसाल बन जाता है। गोहाना के सिविल रोड पर रहने वाली आशा रानी ने इस बात को अपने घर के हर कोने में खिले फूलों से सच कर दिखाया है। आंगन को पौधे से सजाकर, एक बगिया बनाकर उन्होंने नौकरी, परिवार और समाज के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने अपने बचपन के शौक को एक खूबसूरत मोड़ पर ला दिया है।
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आशा रानी को पौधों और फूलों से लगाव बचपन से ही था, लेकिन उन्होंने जीवन में लक्ष्य साफ रखा पहले आजीविका, फिर शौक। सरकारी नौकरी मिलने के बाद वर्ष 2016 से उन्होंने अपने घर में बगीचे की शुरुआत की। आज उनका घर किसी छोटे उद्यान से कम नहीं है।
उनकी इस बगिया में लगभग 55 किस्म के पौधे लगे हुए हैं। हर मौसम के अनुसार नए-नए मौसमी पौधे लगाना, कलम से पौधे तैयार करना और उनकी देखभाल करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। इनडोर और आउटडोर दोनों तरह के पौधों से सजा उनका घर, हर आने वाले मेहमान को सुकून देता है।
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महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक विभाग में असिस्टेंट के रूप में कार्यरत आशा रानी लेखन से भी जुड़ी हुई हैं और सामाजिक कार्यों में भी उनकी गहरी रुचि है। किसी भी पारिवारिक या सामाजिक कार्यक्रम में वह बाहर से बुके खरीदने की बजाय अपने बगीचे से खुद बुके बनाकर ले जाती हैं।
उनका सबसे पसंदीदा फूल कमल है, जिसे वह शांति और सकारात्मकता का प्रतीक मानती हैं। आशा रानी मानती हैं कि पौधे सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि जीवन में धैर्य, अनुशासन और संवेदनशीलता सिखाते हैं।
आशा रानी की बगिया न केवल उनका शौक है, बल्कि आसपास के लोगों, खासकर महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उन्होंने करके दिख दिया कि नौकरी और जिम्मेदारियों के बीच भी प्रकृति से रिश्ता निभाया जा सकता है।
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