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आर्य समाज का हिंदू समाज को संगठित करने में अहम योगदान: आचार्य देवव्रत

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गांव माहरा में आर्य महासम्मेलन में मंचाचीन गुजरात एवं महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सोनीपत।
आर्य समाज ने हिंदू समाज को संगठित करने और वेदों के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया। समाज की कुरीतियों को मिटाकर धार्मिक व्यवस्था को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाई। ये बातें गांव माहरा में पंडित लेखराम के शहीदी दिवस और भगत फूल सिंह की जयंती पर आयोजित आर्य महासम्मेलन में गुजरात एवं महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहीं।
उन्होंने देश की सामाजिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था को मजबूत आधार देने में आर्य समाज के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पंडित लेखराम ने अपने जीवन को समाज सेवा के लिए समर्पित किया। हिंदुओं को धर्म परिवर्तन से बचाने के लिए अथक प्रयास किए।
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भगत फूल सिंह भी शुरू में एक पटवारी थे। आर्य समाज की शिक्षाओं से प्रभावित होकर उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन आर्य समाज के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने गुरुकुल खानपुर की स्थापना की। आर्य समाज ने हजारों हिंदुओं को धर्म परिवर्तन से बचाकर संस्कृति, परंपराओं और वेदों के महत्व को आगे बढ़ाया। आर्य विचारों से न केवल स्थानीय समाज, बल्कि अंग्रेजी शासन भी प्रभावित हुआ।
उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद, पंडित लेखराम और भगत फूल सिंह जैसे महान आर्य समाजियों ने हरियाणा के गांव-गांव और शहरों में आर्य समाज की अलख जगाई। उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि खानपुर, भैंसवाल, मटिंडू, झज्जर सहित अनेक स्थानों पर आज भी गुरुकुल और शैक्षणिक संस्थान संचालित हो रहे हैं।
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महासम्मेलन के दौरान आचार्य देवव्रत ने प्राकृतिक खेती की महत्ता पर भी विशेष जोर दिया। बड़ी संख्या में आर्य समाज के पदाधिकारी, किसान, ग्रामीण और उपस्थित अन्य व्यक्तियों से आह्वान किया कि प्राकृतिक खेती को अपनाकर समाज की व्यवस्था को एक सुव्यवस्थित आधार प्रदान करने में भूमिका का निर्वाह करें।

गांव माहरा में आर्य महासम्मेलन में मंचाचीन गुजरात एवं महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और

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