सोनीपत। जिला न्यायाधीश जगजीत सिंह ने फैसला सुनाया है कि एक मृत व्यक्ति के नाम पर कब्जा जारी रहना कानूनन सही नहीं माना जा सकता जब तक उत्तराधिकारियों का नाम दर्ज न हो। अपीलकर्ताओं ने जो दस्तावेज पेश किए वे अन्य संपत्तियों से संबंधित थे विवादित भूमि से नहीं। इसलिए अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही मानते हुए अपील खारिज कर दी।
कई सालों से पंचायत की भूमि पर किराया देकर खेती करने के एक मामले में जिला न्यायाधीश जगजीत सिंह ने अपीलकर्ता ऋषि प्रकाश व अन्य की याचिका को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है।
गांव राई निवासी ऋषि प्रकाश व अन्य ने दावा किया था कि उनके चाचा हरकेश वर्ष 1969-70 से ग्राम पंचायत की भूमि पर किराया देकर खेती कर रहे थे। वर्ष 1987 में हरकेश की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारी होने के नाते वह इस भूमि पर काबिज हैं और नियमित किराया दे रहे हैं।
इस पर उन्होंने अदालत से स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की थी ताकि नगर निगम उन्हें बेदखल न कर सके। इस संबंध में अपीलकर्ताओं ने साल 2023 में नगर निगम के खिलाफ निचली अदालत में एक याचिका दायर की थी। जिसे सिविल जज (जूनियर डिवीजन) ने 8 सितंबर 2023 को खारिज कर दिया था।
वहीं नगर निगम ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा कि हरकेश के पास कभी भी उक्त भूमि का कब्जा नहीं था और यह जमीन पहले ही वर्ष 2016 में एक खुली नीलामी के माध्यम से धर्मबीर नामक व्यक्ति को पट्टे पर दी जा चुकी है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला न्यायाधीश जगजीत सिंह की अदालत ने पाया कि अपीलकर्ताओं के दावे के अनुसार वह 1987 से किराया दे रहे हैं लेकिन वे एक भी रसीद पेश नहीं कर सके। रिकॉर्ड में अभी भी मृत व्यक्ति (हरकेश) का नाम दर्ज था।