पशुपालन एवं डेयरी विभाग गोवंशों को लंपी वायरस से बचाने के लिए दावे तो कर रहा है, लेकिन अधूरी तैयारी इसमें बाधक बन सकती है। यहां वेटरनरी सर्जनों तक की कमी है। जिले में खोले गए 55 पशु अस्पतालों में से 25 में वेटरनरी सर्जन के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
सोनीपत जिले के उप निदेशक डॉ. संजय आंतिल के पास पानीपत उप निदेशक का भी अतिरिक्त पदभार है। ऐसे में उन्हें दोहरी जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। लंपी वायरस से निपटने के लिए सरकार की ओर से अभी ठोस कदम नही उठाएं गए हैं। तीन दिन पहले ही विभाग ने मुख्यालय से 1.05 लाख वैक्सीन मंगाने का प्रस्ताव भेजा है।
लंपी वायरस को लेकर बेशक जिले में स्थिति सामान्य है, लेकिन वेटरनरी सर्जनों की कमी कभी भी भारी पड़ सकती है। पशु चिकित्सकों की कमी के कारण बेहतर उपचार व देखरेख हो पाना संभव नहीं होगा। सरकार की तरफ से जिले में 55 पशु अस्पताल खोले गए हैं। लेकिन वर्तमान में इनमें से 25 पशु अस्पताल में वेटरनरी सर्जन नहीं है। विभाग की ओर से प्रत्येक वेटरनरी सर्जन को अतिरिक्त अस्पताल का कार्यभार मिला हुआ है। सरकार की ओर से इन पदों को नहीं भरा गया है। फिलहाल विभाग की ओर से अधिकतर गांवों में एनिमल अटेंडेंट (पशु सहायक) के सहारे ही गोवंशों के स्वास्थ्य की जांच कराई जा रही है। जिले में वर्तमान में करीब 1 लाख 4 हजार 884 गोवंश हैं। इसके साथ ही गायों को संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन की समस्या बनी हुई है। बिना वैक्सीन के गायों को संक्रमण से बचा पाना बहुत मुश्किल है। प्रबंध निदेशक के आदेश के बाद विभाग की ओर से 1.05 लाख वैक्सीन मंगवाने का प्रस्ताव भेजा गया है। अभी तक मुख्यालय से वैक्सीन नहीं मिली है। विभाग के अनुसार 29 पंजीकृत गोशाला व चार नंदीशाला हैं। वर्तमान में अभी तक जिले में गोवंश संक्रमण से दूर हैं। गोवंशों की सुरक्षा को लेकर छिड़काव के लिए कीटनाशक की व्यवस्था की गई है। वेटरनरी सर्जन व एनिमल अटेंडेंट अपनी देखरेख में छिड़काव करा रहे हैं।
लक्षण मिलने पर पशु चिकित्सक से संपर्क करे पशुपालक
पशुपालकों के पास विभिन्न नस्ल की देसी, गिर व होलिस्टन जैसी दुधारू गाय हैं। पशु चिकित्सक का कहना है कि प्रदेश के कई जिलों में लंपी वायरस का सबसे ज्यादा असर दुधारू पशुओं पर दिखा है। इस दौरान पशुओं के शरीर पर गांठें बनने लगती है। उन्हें तेज बुखार आता है। इस रोग की चपेट में आने से पशुओं के दूध देने की क्षमता क्षीण हो जाती है। चिकित्सक के अनुसार यह वायरस मच्छरों व मुख्य वजह से खून चूसने वाले कीड़ों से फैलता है। उपाय के तौर पर किसी पशु को लक्षण दिखे तो गाय व अन्य पशुओं से अलग कर दें। किसी अन्य पशु को गाय का झूठा पानी न पिलाएं और चारा न खिलाएं। साथ ही पशुओं को रखने की जगह पर सफाई की विशेष व्यवस्था करें। कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करें। पशुपालक इस मामले की जानकारी पशु चिकित्सक को भी दें।
विभाग की ओर से गोवंशों को लंपी वायरस से बचाव के लिए एहतियात बरती जा रही है। जिले में वेटरनरी सर्जनों के कई पद खाली है। ऐसे में व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रत्येक वेटरनरी सर्जन को अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। वेटरनरी सर्जन व एनिमल अटेंडेंट लगातार फील्ड में रहकर जांच कर रहे हैं। वैक्सीन के लिए मुख्यालय के पास डिमांड भेजी जा चुकी है। -डॉ. संजय आंतिल, उप निदेशक पशुपालन एवं डेयरी विभाग।