सोनीपत। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर 10 नवंबर अक्षय नवमी मनाई जाएगी। इस वर्ष अक्षय नवमी के दिन रवि योग का निर्माण होने के साथ पूरा दिन पंचक भी रहेगा। अक्षय नवमी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु व आंवले के पेड़ की पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है।
ज्योतिषाचार्य आचार्य मनमोहन मिश्रा ने बताया कि सतयुग का प्रारंभ भी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को ही हुआ था। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजन करने से इसे आंवला नवमी के नाम से भी जाना जाता है। शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु व आंवले के पेड़ की पूजा कर ब्राह्मणों, जरूरतमंदों व कन्याओं को भोजन कराने से पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि अक्षय नवमी पर आंवले के पेड़ से अमृत की बूंदें टपकती हैं, जो सेहत के लिए उत्तम मानी जाती हैं। भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने के साथ पाप व कष्ट दूर होते हैं।
यह रहेगा शुभ मुहूर्त
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 09 नवंबर शनिवार रात 10:45 बजे प्रारंभ होकर 10 नवंबर रविवार को रात 9:01 बजे संपन्न होगी। उदयातिथि के आधार पर अक्षय नवमी का पर्व 10 नवंबर को मनाया जाएगा। अक्षय नवमी पर पूजा के लिए सुबह 06:40 से दोपहर 12:27 बजे तक शुभ समय रहेगा। साथ ही ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:55 से 05:47 और अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 से दोपहर 12:27 बजे तक रहेगा।
यह रहेगा पूजा का नियम
अक्षय नवमी पर आंवले के पेड़ के नीचे भगवान विष्णु की पूजा कर प्रभु को आंवले का भोग लगाएं। आंवले के पेड़ की जड़ में जल व कच्चा दूध अर्पित करें। इसके बाद पेड़ पर अक्षत, चंदन, फूल व फल अर्पित करें। मोली का धागा श्रद्धानुसार आठ या 108 बार तक आंवले के पेड़ पर लपेटकर अपनी मनोकामना बताएं। पूजन संपन्न होने पर ब्राह्मण, जरूरतमंदों या कन्याओं को भोजन कराएं।