सोनीपत। वायु प्रदूषण के बीच एलर्जी व चर्म रोगियों की ओपीडी में इजाफा हो रहा है। जिला नागरिक अस्पताल में सप्ताह में तीन दिन ओपीडी लगती है। तीन दिन में 350 से ज्यादा मरीज उपचार कराने पहुंच रहे हैं। लोगों को प्रदूषण से बचने के लिए जरूरी होने पर घर से बाहर निकलने की सलाह दी जा रही है। सड़क से उड़ने वाली धूल ने स्किन एलर्जी के मरीजों की संख्या को बढ़ा दिया है। चर्म रोग ओपीडी में पहले 250 मरीज पहुंचते थे, अब 350 से ज्यादा ओपीडी हो रही है। एलर्जी के मरीजों की संख्या में 20 फीसदी का इजाफा हुआ है।
प्रदूषण की वजह से जिला नागरिक अस्पताल में भी अस्थमा, एलर्जी और चर्म रोग से पीड़ितों की संख्या बढ़ने लगी है। शहर में ऐसी कोई सड़क नहीं है, जहां धूल और धुएं का गुबार नहीं उठता हो। चिकित्सकों का मानना है कि एलर्जी और अस्थमा के रोगियों की तादाद में वृद्धि का कारण शहर में बढ़ रहा वायु प्रदूषण भी है। ऐसे में बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करना भी बेहद जरूरी है। पूरी बाजू तक कपड़े पहनना जरूरी है। प्रतिदिन आने वाले करीब 300 मरीजों को एलर्जी और चर्म रोग संबंधित शिकायत मिल रही है। वातावरण में धूल और धुएं के साथ ही सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों से भी चर्म और एलर्जी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। बचने के लिए जितना हो सके शरीर के हिस्से को ढककर रखा जाना चाहिए। धूल की समस्या महज लोगों को वाहन चलाने में परेशानी की नहीं है, बल्कि लोग धूल से एलर्जी का शिकार भी हो रहे हैं। लोगों को शहर में धूल से बचने के लिए मुंह पर कपड़ा बांधकर चलना चाहिए।
धूल और सर्द मौसम के चलते एलर्जी के केस बढ़े हैं। स्किन एलर्जी के केस भी काफी आ रहे हैं। सबसे ज्यादा सर्दी-जुकाम के मरीज हैं।
- डॉ. राजेश सिंघल, चर्म रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल