प्रशासन व भारतीय किसान यूनियन के बीच चली आ रही रस्साकशी रविवार को प्रशासन के इस आश्वासन पर समाप्त हो गई कि अगले चार दिनों में सर्वे कराकर प्रशासन रिपोर्ट सरकार के पास भेजेगा। इसके लिए सोमवार से ही सर्वे शुरू हो जाएगा। साथ ही किसानों के खेतों से पराली मनरेगा के तहत उठवाने के लिए सरकार से मंजूरी ली जाएगी। सर्वे टीम में बीमा कंपनी के अलावा राजस्व व कृषि विभाग के अधिकारी भी शामिल रहेंगे।
भारतीय किसान द्वारा मुआवजे की मांग को लेकर किए जा रहे आंदोलन के समाप्त होने से प्रशासन ने राहत की सांस ली है। यूनियन ने एडीसी के आश्वासन के बाद ही धरना समाप्त करने की घोषणा की है। हालांकि, यह चेतावनी भी दी कि चार दिन में सही रिपोर्ट न देने पर दोबारा आंदोलन किया जाएगा। रविवार को पंचायत की अध्यक्षता बुटाना बारहा के प्रधान राजेंद्र कुंडू ने की, जबकि संचालन रोहतक मंडल के प्रधान सत्यवान नरवाल ने किया।
भारतीय किसान यूनियन ने धान की फसल में बीमारी लगने से खराब होने पर मुआवजे की मांग को लेकर 17 अक्टूबर को एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना व क्रमिक अनशन शुरू किया था। किसान फसल बीमा योजना का विरोध करने के साथ-साथ सरकार से विशेष गिरदावरी कराकर मुआवजा देने की मांग कर रहे थे। जबकि प्रशासन बार-बार बीमा कंपनी की पॉलिसी का हवाला देकर टरकाता रहा। वहीं, किसानों के धरने को विपक्षी पार्टियों ने भी समर्थन दिया, जिससे प्रशासन अलर्ट हो गया। महापंचायत को लेकर शनिवार देर शाम तक एडीसी शिवप्रसाद शर्मा व एसडीएम अजय कुमार के साथ डीएसपी राजीव देशवाल ने काफी देर तक गहन मंत्रणा की, लेकिन सहमति नहीं बन पाई थी।
भाकियू ने ये रखी थी शर्तें
भाकियू व प्रशासन के बीच जिन मुद्दों पर सहमति बनी है, उनमें बीमारी से खराब हुई फसलों की गिरदावरी कराकर चार दिन में रिपोर्ट सरकार को देने के अलावा पराली को खेतों में जलाने की बजाए मनरेगा के तहत मजदूरों से उठवाने, गांव वजीरपुरा में माइनर टूटने से खराब हुई फसलों का मुआवजा देने, पराली को बंडलों में बांधने के लिए मशीन उपलब्ध कराने तथा पराली जलाने वाले किसानों पर कम से कम मामले दर्ज करने की भी मांग रखी गई।
यह बनी सहमति
प्रशासन ने भारतीय किसान यूनियन द्वारा रखी गई सभी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, एसडीसी किसानों की इस मांग का स्पष्ट जवाब नहीं दे गए कि किसानों के खेतों से पराली मनरेगा के तहत उठवाई जाएगी। वह बोले, यह सरकार का मामला है। सरकार के दिशा-निर्देशों के मुताबिक काम किया जा रहा है। इस बारे में सरकार से मंत्रणा करके किसानों को बता दिया जाएगा।
ये रहे नेताओं के बोल
किसान पंचायत में पहुंचे बरोदा के विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा ने कहा कि वह भी किसान हैं और किसान होने के नाते इस पंचायत में आए हैंश्। सरकार द्वारा लागू की गई फसल बीमा योजना में कई खामियां हैं। उन्हें दूर करने के बाद ही इस योजना को लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने किसानों को बीमा राशि का प्रीमियम ब्याज समेत वापिस देने की मांग भी उठाई।
एक-एक एकड़ का होना चाहिए सर्वे
इनेलो प्रवक्ता डॉ. केसी बांगड़ ने कहा कि जब बीमा कंपनी ने एक-एक एकड़ का बीमा कर उसकी प्रीमियम राशि ले रखी है तो प्रति एकड़ के हिसाब से ही खराब हुई फसलों का सर्वे कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनी द्वारा जो पॉलिसी बताई जा रही है। उसके हिसाब से मुआवजा मिलना संदेह के घेरे में है।
अब 25 नवंबर को कुरुक्षेत्र में तैयार होगी रणनीति
भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने घोषणा की कि प्रशासन द्वारा उनकी मांगें मानने का आश्वासन दिया है। इसका आंकलन करने व स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू कराने की माग को लेकर यूनियन द्वारा 25 नवंबर को कुरुक्षेत्र में पिपली अनाज मंडी में किसान पंचायत बुलाई है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में होने वाली पंचायत में प्रशासन द्वारा जो आश्वासन दिया गया है, इसकी समीक्षा की जाएगी तथा सरकार से स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करवाने का दबाव बनाने के लिए रणनीति तैयार की जाएगी।