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प्रशासन-भाकियू के बीच नहीं बनी बात, महापंचायत आज

Sun, 23 Oct 2016 01:13 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, गोहाना
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किसान नेताओं से बातचीत करते हुए प्रशासनिक अधिकारी। - फोटो : sonipat
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मुआवजे की मांग को लेकर भारतीय लेकर आंदोलन कर रही भारतीय किसान यूनियन की रविवार को होने वाली महापंचायत को लेकर प्रशासन और यूनियन पदाधिकारियों के बीच बातचीत बेनतीजा रही। शनिवार देर शाम सोनीपत के अतिरिक्त उपायुक्त शिवप्रसाद शर्मा व एसडीएम अजय कुमार ने किसान नेताओं से बातचीत की। किसान अपनी मांग पर अड़े हुए हैं कि पहले सरकार गिरदावरी कराने की घोषणा करें, अन्यथा आंदोलन जारी रहेगा।
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बता दें कि पिछले छह दिनों से मिनी सचिवालय में जारी क्रमिक अनशन को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है। लेकिन बात सिरे नहीं चढ़ पा रही है। शनिवार देर शाम प्रशासन की ओर से किसानों को संदेश भेजा गया कि सोनीपत के उपायुक्त केएम पांडुरंग उनसे वार्ता के लिए आ रहे हैं। काफी देर इंतजार करने के बाद डीसी की बजाए एडीसी एसके शर्मा सिंचाई विश्राम गृह में पहुंचे। बाद में एसडीएम अजय कुमार भी पहुंच गए। भाकियू की ओर से रोहतक मंडल के प्रधान सत्यवान नरवाल के नेतृत्व में किसानों का दल प्रशासनिक अधिकारियों से मिलने पहुंचा।
किसानों ने प्रशासन के समक्ष जो मामले उठाए उनमें सबसे पहले सरकार से विशेष गिरदावरी कराने की घोषणा करने की शर्त रखी। उन्होंने कहा कि बाकी मामले बेशक बाद में सुलझा लिए जाएंगे। सबसे अहम मुद्दा किसानों की फसल का मुआवजा देने का है। अब तक सरकार ने यह नहीं बताया है कि उनकी फसलों का बीमा किस कंपनी से करवाया गया है। प्रशासन ने बताया कि बजाज एलायंज कंपनी द्वारा बीमा किया गया है। प्रशासन ने किसान नेताओं को आश्वासन दिया कि सोमवार से बीमा कंपनी के सर्वेयर खेतों में जाकर सर्वे का काम शुरू कर देंगे। उनके साथ राजस्व विभाग की टीम भी रहेगी। किसान इस बात पर सहमत नहीं हुए और कहा कि रविवार 10 बजे तक सरकार गिरदावरी की घोषणा कर देगी तो आंदोलन को रोका जा सकता है। किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार उनके आंदोलन को रोकने के लिए ओछे हथकंडे अपना रही है।
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विपक्षी दलों के समर्थन से उड़ी प्रशासन की नींद
किसान आंदोलन को विपक्षी दलों इनेलो व कांग्रेस द्वारा समर्थन देने की खुफिया विभाग की रिपोर्ट मिलते ही प्रशासन की नींद उड़ गई तथा आनन-फान में किसान नेताओं से वार्ता कर आंदोलन को रोकने की प्रयास किया गया। स्वयं एडीसी दो-तीन दौर की वार्ता कर चुके हैं। लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। 

अब कोर्ट का रुख करेंगे किसान
किसानों ने आंदोलन के साथ-साथ कोर्ट में भी जाने का फैसला किया है। जिसमें किसान उन बैंक मैनेजरों को पार्टी बनाएंगे, जिन्होंने बिना उनकी अनुमति उनके खातों से बीमा राशि का प्रीमियम काट लिया था। उनका कहना है कि नियमानुसार ग्राहक की सहमति के बिना उसके खाते से रकम निकालना कानूनी अपराध है। इसके लिए कानूनी सलाह ली जा रही है कि हाईकोर्ट में केस डाला जाए या फिर स्थानीय अदालतों में केस किया जाए। कांग्रेसी विधायक ने किसानों को ऑफर दिया है कि हाईकोर्ट में वह उनका केस लड़ेंगे।
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फोटो 35- किसान नेताओं से बातचीत करते हुए प्रशासनिक अधिकारी।
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