पीआर वैरायटी धान की खरीद नहीं होने से किसानों और आढ़तियों में मायूसी है। जिस भाव में पीआर धान खरीदा जाना है, उस भाव में प्राइवेट एजेंसियों को 1121 वैरायटी का धान मिल रहा है। जिसके चलते वे पीआर धान से मुंह मोड़ रहे हैं। ।
आढ़तियों का कहना है सरबती, पीआर और एचआर-10 के धान को सरकारी एजेंसियां नहीं खरीद रही हैं। केवल 1509 और 1121 किस्म का धान ही खरीदा जा रहा है। एफसीआई और डीएफसी ने भी पहले से धान खरीदने से मना कर दिया था। अब हैफेड ने भी पिछले एक सप्ताह से मंडी में धान खरीदने से मना कर दिया। जिससे किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम राशि में धान की फसल को प्राइवेट एजेंसियों को बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। गांव सबौली के एक किसान के पीआर धान की करीब चार ढेरियां पड़ी हैं। जिसे प्राइवेट एजेंसियां खरीदने से मना कर रही है। बताया जा रहा है कि उस किसान ने करीब 60 एकड़ पीआर धान की फसल उगाई है, लेकिन बिक नहीं रही। जिससे उसे भारी नुकसान हो रहाहै। मंडी के अंदर करीब 1000 कट्टे पीआर धान के बिकने की बांट जोह रहे है।
रोहतक की मंडियों से छोड़ी आस, तो चले आए सोनीपत की मंडी में रोहतक के किसान
शुक्रवार को रोहतक जिले के गांव रुड़की और पाकसमा गांव के किसानों ने रोहतक की मंडियों से मुंह मोड़ लिया। वह वहां से 50 रुपये ज्यादा 1121 वैराइटी धान का भाव सोनीपत मंडी में मिलने और समय पर भुगतान होने की उम्मीद से आए। रोहतक के किसान शुक्रवार को करीब 125 एकड़ की धान की फसल लाए और रोहतक मंडियों से ज्यादा सोनीपत मंडी में भाव मिलने की आशा व्यक्त की। अमर उजाला टीम जब गांव रुड़की वासी राकेश, प्रकाश, संजय, सुरेश, संजय, गांव पाकसमा निवासी अशोक उनका कहना था रोहतक की मंडियों में बुरा हाल है। मंडियों में किसानों की सुनवाई तक नहीं है। सोनीपत मंडी में वहां से 50 रुपये ज्यादा धान की फसल की बिक्री हुई है। रोहतक की मंडियों में भुगतान एक माह के बाद होता है। यहां पर दो दिन के अंदर ही भुगतान हो रहा है।