फोटो 03- सोनीपत के गांव रसोई स्थित मदीना मस्जिद में नमाजियों को ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर्व का महत
सोनीपत। ईद-उल-अजहा (बकरीद) का शनिवार को हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। मुख्य नमाज ईदगाह व मस्जिदों में सुबह 6 से 8:30 बजे तक पढ़ी गई। नमाजियों ने अमन, शांति व भाईचारे की दुआ की की कामना की।
कुर्बानी व त्याग के ईद पर्व को मनाने के लिए मस्जिदों में पहले से ही तैयारियां कर ली गई थीं। सुबह से ही बच्चे, नौजवान व बुजुर्ग मस्जिदों में पहुंचने लगे थे। इमाम ने सभी को पर्व के महत्व व इससे जुड़ी ऐतिहासिक बातों से अवगत कराया। सुरक्षा के मद्देनजर मस्जिदों के बाहर पुलिस बल तैनात रहा
बुराइयों का त्याग करना भी है कुर्बानी
रसोई स्थित मदीना मस्जिद के इमाम नसीम कासमी ने बताया कि ईद-उल अजहा हमें मोहब्बत का पैगाम देता है। इस दिन कुर्बानी व दान करने का खास महत्व है। कुर्बानी करने से इब्राहिम अलेही सलाम की सुन्नत को जिंदा रखा जाता है। कुर्बानी सिर्फ बकरा की ही नहीं, लोग अपनी बुराइयों का त्याग करके भी करते हैं।
बकरों की कीमतों में उछाल
दुकानदार अकील ने बताया कि ईद-उल-अजहा की वजह से बकरों की कीमत बढ़नी लाजमी है। करीब 15 दिन पहले 10 से 12 हजार रुपये में बिकने वाले बकरों की कीमत दोगुनी हो जाती है। साथ ही बकरों की कीमत ऊंचाई व गुणवत्ता के हिसाब से आंकी जाती है। ऐसे में बकरे की कीमत 18 से 35 हजार रुपये रही।
फोटो 03- सोनीपत के गांव रसोई स्थित मदीना मस्जिद में नमाजियों को ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर्व का महत
फोटो 03- सोनीपत के गांव रसोई स्थित मदीना मस्जिद में नमाजियों को ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर्व का महत