सोनीपत। जनवरी में टोल कर्मी के अपहरण, मारपीट, लूट व जान से मारने की धमकी के एक मामले में एएसजे नरेंद्र सिंह ने आरोपी जयबीर की जमानत याचिका को खारिज करने का फैसला सुनाया है। ट्रक चालक की ओर से टोल अदा न करने को लेकर टोल कर्मी से विवाद हुआ था।
शिकायतकर्ता सचिन झरोठ टोल प्लाजा पर काम करता है। उसने शिकायत दर्ज कराई कि 25 जनवरी को टोल शुल्क न देने को लेकर उसका ट्रक ड्राइवर आशीष के साथ विवाद हुआ था। बदला लेने के लिए 26 जनवरी शाम करीब 4 बजे आशीष उर्फ भोला अपने दोस्तों परवीन, सागर और जयबीर के साथ एक कार में आया।
उन्होंने उसे रास्ते में रोका, जबरन कार में बिठाया और मारपीट की। उन्होंने मुंह, नाक और सिर पर वार किए, जान से मारने की धमकी दी और उसका मोबाइल लूटा व उसे सड़क पर फेंक दिया। इसके बाद पीड़ित ने 27 जनवरी को सदर थाने में शिकायत दी थी। इसी मामले में गांव सेहरी, तहसील खरखौदा के जयबीर ने जमानत याचिका दायर की थी।
आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि घटना 26 जनवरी की है जबकि एफआईआर 27 जनवरी को दर्ज हुई। घटना के समय जयबीर कार की अगली सीट पर बैठा था जबकि पीड़ित पिछली सीट पर था इसलिए वह चोट नहीं पहुंचा सकता था।
आरोपी 5 फरवरी से हिरासत में है, जांच पूरी हो चुकी है और चालान पेश किया जा चुका है इसलिए उसे हिरासत में रखने की जरुरत नहीं है। वहीं सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपियों ने टोल कर्मचारियों को डराने के लिए पूरी घटना का वीडियो बनाया और वायरल भी किया।
यह वीडियो सबूत के रूप में चालान का हिस्सा बनाया गया है। अभियुक्त को जमानत दी गई, तो वह गवाहों को डरा-धमका सकता है। दोनों पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड देखने के बाद अदालत ने माना कि जमानत देते समय अपराध की गंभीरता, गवाहों को प्रभावित करने की संभावना और समाज पर इसके प्रभाव को देखना आवश्यक है।
आरोपियों ने न केवल अपहरण और मारपीट की बल्कि अन्य कर्मचारियों को डराने के लिए वीडियो बनाकर उसे वायरल भी किया। अपराध की प्रकृति और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की जमानत को खारिज कर दिया।