सोनीपत। एएसजे डॉ. जसबीर सिंह की कोर्ट ने गांव गंगाना निवासी मनीषा को किशोरी का अपहरण कर जबरन शादी कराने के आरोप से चार साल बाद बरी कर दिया। यह शादी रेवाड़ी में कराई गई थी। तब लड़का-लड़की दोनों ही नाबालिग थे।
किशोरी के पिता ने अपहरण करके शादी कराने की 25 अप्रैल 2022 को बरोदा थाने में एफआईआर कराई थी। बताया था कि गांव गंगाना के रहने वाला किशोर (16) उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया है। वह शादी करना चाहता है।
पुलिस ने किशोरी को 9 अप्रैल 2022 को रेवाड़ी में पकड़ लिया। अगले दिन आरोपी किशोर को गिरफ्तार कर लिया गया। जन्म प्रमाण पत्र से आरोपी के नाबालिग होने का पता चला। इसके बाद मामला किशोर न्याय बोर्ड भेज दिया गया।
किशोरी ने कोर्ट में कहा कि मनीषा उन्हें बुलाकर ले गई थी। कहा था, 2-3 घंटे के लिए रेवाड़ी चलना है। वहीं किशोर मिला। मनीषा ने बिना सहमति के उसकी किशोर से शादी करा दी। रेवाड़ी में ही एक कमरा किराए पर दिला दिया। वे घर से बाहर जाते तो कमरे में ताला लगा देते थे।
मनीषा के अधिवक्ता ने दलील दी कि उसने कोई विवाह नहीं कराया। अभियोजन पक्ष भी विवाह से जुड़े दस्तावेज नहीं दिखा पाया। किशोरी भी शादी कराने वाले पंडित का नाम नहीं बता सकी। इसी आधार पर कोर्ट ने वीरवार को मनीषा को आरोपों से बरी कर दिया।