गोहाना। क्षेत्र में सेम की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। कई गांवों में पानी भरा रहने से जमीन पर खेती करना मुश्किल हो चुका है। सेम के कारण हजारों एकड़ कृषि भूमि की उपज कम होती जा रही है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कई जगह सूखे की समस्या भी विकराल बनी हुई है।
सरकार ने किसानों को इससे राहत दिलाने के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। इन पर अप्रैल या मई में काम शुरू होने के आसार हैं। छिछड़ाना निवासी किसान पूर्ण और बरोदा मोर के जितेंद्र सिंह ने बताया कि उनके क्षेत्र में हर गांव के साथ लगभग 50 से 100 एकड़ जमीन सेम से ग्रसित है।
सरकार के कई प्रोजेक्ट आते हैं लेकिन पैसे का सही उपयोग नहीं होने से समस्या जस की तस बनी रहती है। कहीं सूखे की मार पड़ रही है तो कहीं खेतों में पानी भराव से खेती खराब हो रही है। बनवासा और कैहल्पा के किसान रणबीर सिंह, अनुज, रतिराम, रिंढाणा के रविंदर और अन्य ने कहा कि सेम से ग्रसित भूमि का सही प्रबंधन नहीं हो पा रहा है।
सरकार को सेम वाली जमीन से पानी निकालकर नल या साइफन के माध्यम से सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। इससे दोनों ही तरह की समस्याओं का हल हो जाएगा। इलाके की जमीन उपजाऊ होगी तभी किसानों की तरक्की संभव है।
कृषि विभाग में कार्यरत एएससीओ डॉ. सुरेंद्र ने बताया कि गोहाना और कथूरा ब्लॉक में लगभग 30 हजार एकड़ कृषि भूमि सेम से प्रभावित है। इसके समाधान के लिए दो तरह की तकनीक अपनाई जा रही है। ये पहली वर्टिकल ड्रेनेज सिस्टम और दूसरी सब सरफेस ड्रेनेज सिस्टम हैं।
वर्टिकल ड्रेनेज सिस्टम के लिए बरोदा मोर, ईसापुर खेड़ी, आंवली और भादी गांवों के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। हर दो एकड़ जमीन पर सोलर से चलने वाले पंप लगाए जाएंगे। ये खराब पानी को जमीन से निकालकर ड्रेन में डालेंगे। बरसात का पानी इस खराब पानी की जगह ले लेगा, जिससे जमीन फिर से उपजाऊ हो जाएगी।
इस योजना में एक करोड़ रुपये से अधिक लागत के दो बड़े प्रोजेक्ट भी लगाए जा रहे हैं। इनमें पीजो मीटर लगाए जाएंगे, जो सेम की जानकारी देंगे। हर दो साल में मिट्टी और पानी के सैंपल लेकर पहले के सैंपल से तुलना की जाएगी।
एएससीओ डॉ. सुरेंद्र ने बताया कि दूसरी तकनीक सब सरफेस ड्रेनेज सिस्टम छपरा और गंगाना गांव में लगाने का प्रस्ताव है। यह तकनीक ज्यादा मात्रा में नमक वाली जमीन जमीन पर लगाई जाती है। यह वर्टिकल ड्रेनेज सिस्टम से महंगी तकनीक है। जहां जमीन की विद्युत चालकता 6000 ईसी तक होती है, वहां वर्टिकल ड्रेनेज सिस्टम लगाया जाता है।
इसके अलावा जहां 8, 10 या 12 हजार ईसी से ज्यादा होती है, वहां सब सरफेस ड्रेनेज सिस्टम लगाया जाता है। वहीं एएससीओ डॉ. सुरेंद्र ने बताया कि फिलहाल खेतों में फसल खड़ी होने के कारण काम शुरू नहीं हो पाया है। टेंडर जारी कर दिए गए हैं और जमीन खाली होने पर अप्रैल या मई में काम शुरू होकर इसी सीजन में पूरा कर लिया जाएगा।