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मिस वर्ल्ड रही मानुषी को नियमों की धज्जियां उड़ा जारी की एनओसी, कश्मीरी छात्रा को नहीं मिली

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मिस वर्ल्ड रहीं मानुषी को नियमों की धज्जियां उड़ा जारी की एनओसी
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अशोक शर्मा
गोहाना (सोनीपत)। बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज खानपुर में छात्राओं के साथ खूब भेदभाव किया जा रहा है। वहां सेलिब्रिटी व आम छात्राओं के लिए अलग-अलग नियम हैं और सेलिब्रिटी के लिए नियमों की धज्जियां तक उड़ा दी जाती हैं। ऐसा ही मिस वर्ल्ड रहीं मानुषी छिल्लर को कालेज बदलने की एनओसी देने में किया गया है। मानुषी अब बीपीएस मेडिकल कालेज को छोड़कर मुंबई में पढ़ना चाहती हैं, लेकिन उसने आवेदन करते हुए मुंबई के उस कालेज की एनओसी नहीं लगाई। उसने कालेज बदलने का कोई ऐसा कारण भी नहीं बताया, जिससे कालेज बदलने की जरूरत पड़ रही है। उसके लिए कालेज में कोई कमेटी नहीं बैठी तो एमसीआई से अनुमति तक नहीं ली गई और उसे पंडित बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी से केवल पंद्रह दिन में एनओसी जारी कर दी गई है। जबकि 2017 में कालेज बदलने के लिए कश्मीरी छात्रा को आज तक एनओसी नहीं दी गई है।
मिस वर्ल्ड रहीं मानुषी छिल्लर ने वर्ष 2014 में बीपीएस महिला मेडिकल कालेज खानपुर कलां में एमबीबीएस में एडमिशन लिया था और वह अपना पहला प्रॉस पूरा कर चुकी हैं। जब वह मिस वर्ल्ड के लिए गई थीं तो उस समय दूसरा प्रॉस शुरू हो गया था। जिसके बाद मानुषी छिल्लर मिस वर्ल्ड बनीं और वह अभी तक कॉलेज नहीं आई थीं। मानुषी ने दूसरे प्रॉस की परीक्षा छोड़ दी थी और वह पिछले ढाई साल से कालेज से अनुपस्थित हैं। लेकिन कालेज में मानुषी छिल्लर का लगभग एक महीने पहले ही पत्र आया, जिसमें उसने कोई ठोस कारण लिखे बिना कालेज बदलने के लिए एनओसी मांगी थी। मानुषी ने यह जरूर लिखा था कि वह मुंबई के कालेज में पढ़ना चाहती हैं और उसने मुंबई के उस कालेज से पहले एनओसी तक नहीं ली, जिससे वह एमबीबीएस करना चाहती हैं। इसके बाद के सभी नियमों को कालेज प्रशासन ने ताक पर रख दिया और एनओसी जारी करने को कमेटी नहीं बैठी, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) से अनुमति तक नहीं ली गई। इसके बावजूद फाइल पर अनुमति देकर पंडित बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार के पास भेज दी गई। अब रजिस्ट्रार की ओर से भी मानुषी को कालेज बदलने की एनओसी जारी कर दी गई है।
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यह है एनओसी लेने का नियम
एमबीबीएस का कोई छात्र अगर एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज में जाना चाहता है तो इसके लिए उसे पहले प्रॉस की परीक्षा देने के बाद उत्तीर्ण होने पर आवेदन करना होगा। उसको जिस कालेज में जाना है, वहां से एनओसी लेनी होगी कि वहां सीट खाली है और उनको अपने यहां उस छात्र को प्रवेश देने में कोई आपत्ति नहीं है। यह एनओसी आवेदन पत्र के साथ लगाई जाती है और उस आवेदन में कालेज बदलने की ठोस वजह भी बतानी होती है कि वह इस परेशानी के कारण कालेज बदलना चाहता है। कालेज में यह सभी दस्तावेज जमा कराने के बाद वहां से अनुमति देकर यूनिवर्सिटी भेज दिया जाता है, जहां से फाइल मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को जाती है। वहां कमेटी की अनुमति मिलने के बाद ही एनओसी जारी होती है। लेकिन मानुषी छिल्लर ने मुंबई के कालेज का कोई दस्तावेज नहीं लगाया, जहां वह प्रवेश लेना चाहती है और उसने कालेज बदलने की कोई वजह तक नहीं बताई है। उसने मुंबई के कालेज का नाम भी नहीं लिखा है।
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खाली सीट पर कोई नहीं ले सकता है प्रवेश
मानुषी छिल्लर को एनओसी जारी कर दी गई है। उसके यहां से जाने के बाद कॉलेज में सीट खाली हो गई है। सीट खाली होने के बाद अब कोई दाखिला नहीं ले पाएगा। क्योंकि तीन साल का समय बीत चुका है। अब कॉलेज की यह सीट खाली रहने से सरकार को फीस का नुकसान झेलना पड़ेगा।
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कश्मीरी छात्रा को नहीं दी गई थी एनओसी
बीपीएस कॉलेज में कश्मीर की एक छात्रा भी एमबीबीएस करती है, उसने 2017 में अपने माता-पिता अकेले होने के साथ ही कश्मीर में हालात खराब होने की बात कहते हुए कालेज बदलने के लिए एनओसी मांगी थी। यह बताया जा रहा है कि उसके पास कालेज बदलने की ठोस वजह थी, लेकिन वह कश्मीर के कालेज से उस समय एनओसी लेकर नहीं आई थी। उस समय कश्मीरी छात्रा को एनओसी देने से साफ इंकार कर दिया गया था।
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मानुषी छिल्लर को लगभग 15 दिन पहले यूनिवर्सिटी की ओर से एनओसी जारी की गई है। वह किसी मुंबई के कॉलेज में जाना चाहती है। मेरे पास यह स्पेशल केस बनकर आया था। उसकी फाइल पर बीपीएस कॉलेज प्रशासन ने नो आब्जेक्शन लिखकर भेजा था। जिसके आधार पर उसेे एनओसी जारी की गई। इससे ज्यादा मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता हूं।
-डॉ. एचके अग्रवाल, रजिस्ट्रार पंडित बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी रोहतक।
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