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किसानों को 6 हजार सम्मान राशि पत्थर की लकीर नहीं, इसे बढ़ाया भी जाएगा, प्रदेश सरकार भी बढ़ाए: बीरेंद्र सिंह

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किसानों को 6 हजार सम्मान राशि पत्थर की लकीर नहीं, इसे बढ़ाया भी जाएगा, प्रदेश सरकार भी बढ़ाए: बीरेंद्र सिंह
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अमर उजाला ब्यूरो
गन्नौर/सोनीपत। केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह ने कहा कि हर कोई खेती की उत्पादकता बढ़ाने की बात करता था, लेकिन पहली बार किसी सरकार ने किसानों के बारे में सोचा है और उनके लिए छह हजार रुपये सम्मान राशि शुरू की गई है। यह छह हजार रुपये सम्मान राशि तय करना भी पत्थर की लकीर नहीं है, अभी कलम व कागज खत्म नहीं हुए हैं और उसे आगे बढ़ाया भी जाएगा। बीरेंद्र सिंह ने प्रदेश सरकार के लिए भी कहा कि इसे प्रदेश सरकार भी अपने स्तर पर छह हजार से ज्यादा कर सकती है। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि इस छह हजार की राशि को ऊंट के मुंह में जीरा कहने वालों को यह बताना चाहिए कि पहले किस सरकार ने ऊंट के मुंह में ऐसा जीरा डाला है। बीरेंद्र सिंह गन्नौर की अंतरराष्ट्रीय बागवानी मंडी में एग्री लीडरशिप समिट का उद्घाटन करने पहुंचे थे।
गन्नौर की अंतरराष्ट्रीय बागवानी मंडी में एग्री लीडरशिप समिट में सबसे पहले जम्मू कश्मीर के पुलवामा में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन रखा गया। उसके बाद केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह, कृषि मंत्री ओपी धनखड़, मंत्री कविता जैन, सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर, मार्केट बोर्ड की चेयरपर्सन कृष्णा गहलावत ने दीप जलाकर समिट का उद्घाटन किया। जिसके बाद केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि देश की आजादी के 70 साल बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने किसानों की आर्थिक दशा सुधारने की बात सोची है और इसलिए ही छह हजार रुपये सम्मान राशि देने का फैसला लिया है। यह छह हजार रुपये भी बुढ़ापा पेंशन की तरह बढ़ेंगे, जैसे पहले बुढ़ापा पेंशन 100 रुपये शुरू हुई थी और वह अब 2 हजार रुपये हो गई है। इस तरह ही यह छह हजार रुपये की सम्मान राशि हर किसी को बढ़ानी पड़ेगी। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि मंडी में बिचौलियों को खत्म कर दिया जाए तो किसानों का लाभ काफी बढ़ जाएगा, क्योंकि अभी तक किसानों का काफी लाभ मंडी में फसल बिकवाने के लिए बिचौलिए खा जाते हैं। बीरेंद्र सिंह ने गन्नौर की अंतरराष्ट्रीय बागवानी मंडी का कार्य अभी तक पूरा नहीं होने को लेकर भी पिछली व वर्तमान सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने लंबे समय से इसे लटकाए हुए रखा और अब सरकार भी चार साल बाद इस पर ध्यान दे रही है।
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यहां भैंसे का सीमन 70 लाख में बिकने की बात कह रहे, लोग 7 हजार करोड़ लेकर विदेश भाग गए
केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने अपने संबोधन के दौरान कृषि मंत्री ओपी धनखड़ पर भी तंज कसते हुए कहा कि धनखड़ साहब मेरे से बता रहे थे कि यहां भैंसे का सीमन बेचकर पशुपालक 70-70 लाख रुपये कमा रहे हैं। लेकिन 70 लाख रुपये ऐसे लोगों के सामने कम हैं जो 7 हजार करोड़ रुपये लेकर विदेश भाग जाते हैं। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि बैंक अफसर भी ऐसे लोगों को ऋण देने में नहीं कतराते हैं जो उनका रुपया लेकर भाग रहे हैं। बल्कि किसान ऋण लेने जाता है तो उसे टरका दिया जाता है और इस तरह से बैंकों की मानसिकता भी गलत हो रही है।
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राष्ट्रपति के हाथों से पहली बार दिलाया जाएगा हरियाणा किसान रत्न पुरस्कार: ओपी धनखड़
कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने एग्री लीडरशिप समिट में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों को हर स्टॉल में जाकर वहां से कुछ न कुछ जरूर सीखना चाहिए। क्योंकि प्रदेश के पास दिल्ली का बड़ा बाजार है और उस बाजार में किसान सीधा अपनी फसल बेच सकता है। इसलिए दिल्ली के बाजार को कब्जाना चाहिए। कहा कि पहले किसानों को पद्मश्री पुरस्कार बहुत कम मिलते थे, लेकिन यह पहली बार हुआ है कि 12 किसानों को पद्मश्री मिला है और उनमें से तीन किसान हरियाणा के रहने वाले हैं। मंत्री ओपी धनखड़ ने कहा कि हरियाणा सरकार भी नया हरियाणा किसान रत्न पुरस्कार शुरू कर रही है जो इस समिट में समापन वाले दिन राष्ट्रपति के हाथों से दिलवाया जाएगा। मंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में 3640 करोड़ रुपये किसानों को मुआवजे के रूप में दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि हरियाणा पहला ऐसा राज्य है, जहां इस तरह के सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इस प्रकार पशु मेलों का भी आयोजन किया गया, जिसमें मुर्राह भैंस व भैंसेे, साहीवाल नस्ल गाय व सांड़ रैंप पर चलते नजर आए हैं। ओपी धनखड़ ने कहा कि गन्नौर में 600 एकड़ में स्थापित अंतरराष्ट्रीय मंडी को शीघ्र ही चालू कर दिया जाएगा। इसके लिए जेएस यादव को प्रबंध निदेशक बना दिया गया है। समिट में सहकारिता राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन, मार्केटिंग बोर्ड की चेयरपर्सन कृष्णा गहलावत ने भी संबोधन किया।
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यह सभी मौजूद रहे
श्रम मंत्री नायब सिंह सैनी, सांसद रमेश कौशिक, विधायक डॉ. पवन सैनी, हरियाणा किसान आयोग के चेयरमैन डॉ. रमेश यादव, कृषि विभाग की एसीएस नवराज संधु, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के मुख्य प्रशासक जे गणेशन, एसीएस एसके गुलाटी, अजीत बालाजी जोशी, लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय हिसार के कुलपति डॉ. गुरदयाल सिंह, आदि मौजूद रहे।
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सेमिनार में किसानों को किया गया जागरूक
एग्री समिट हरियाणा में शुक्रवार को सभागार नंबर दो में आयोजित सेमीनार में संबोधन करते हुए डा. राजेश गेरा ने कहा कि खेती कोई घाटे का सौदा नहीं है। कृषि कार्य विविधता के साथ आधुनिक यंत्र व तकनीक से किया जाए तो इसमें लाभ की संभावना अधिक रहेगी। देश की 65 प्रतिशत आबादी युवा है और खेती रोजगार का बेहतर विकल्प बन सकती है। सहायक प्रोफेसर डा. सुबोध अग्रवाल ने कहा कि आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल से देश का किसान समृद्ध हुआ है। किसान का तालमेल सीधे व्यापारियों से होना चाहिए। सेमीनार में डा. अरविंद मलिक ने कहा कि कृषि क्षेत्र का पर्यटन के लिए भी उपयोग हो सकता है। यूरोपीय देशों से ऐसे अनेक पर्यटक भारत आते हैं जो यहां के गांवों को देखना चाहते हैं। ग्रामीण जनजीवन पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। डा. दलीप बिश्रोई ने ई मार्केटिंग पर जोर देते हुए कहा कि फसलों की ऑनलाइन बिक्री किसानों को सीखनी चाहिए और इसके लिए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए। किसान अपने उत्पादों को घर बैठे बेच सकते हैं। डा. चिंदीवासुदेवप्पा ने सेमीनार में खेती के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी।
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