विद्यार्थियों को पाइथन लैंग्वेज की जानकारी देते कुलपति प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत।
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सोनीपत। दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी ने अपने विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ-साथ पाइथन लैंग्वेज सिखाने का निर्णय लिया है। ताकि पाइथन लैंग्वेज सीखने के बाद विदेश में विद्यार्थियों को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। फिलहाल विकसित देशों में पाइथन लैंग्वेज को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे में यूनिवर्सिटी ने तय किया है कि विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ पाइथन लैंग्वेज का ज्ञान होगा तो उन्हें विदेश में प्लेसमेंट में प्राथमिकता मिलेगी। विद्यार्थियों को पाइथन लैंग्वेज सिखाने के लिए यूनिवर्सिटी 4.50 लाख रुपये खर्च कर रही है।
मुरथल यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग द्वारा पाइथन विद डाटा साइंस एंड मशीन लर्निंग पर दस दिन की कार्यशाला का शुक्रवार से आयोजन किया जा रहा है, जिसमें कोआर्डिनेटर डॉ. दिनेश सिंह व डॉ. संजीव इंदौरा है। कार्यशाला में 90 विद्यार्थियों को पाइथन लैंग्वेज सिखाने के साथ ही प्रैक्टिकल भी करवाएं जाएंगे।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए आवश्यक है पाइथन लैंग्वेज
मुरथल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत ने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए हमें पाइथन लैंग्वेज का ज्ञान होना आवश्यक है। क्योंकि अधिकतर विकसित देशों में पाइथन लैंग्वेज का प्रयोग किया जाता है। पाइथन लैंग्वेज के ज्ञान के बाद वैश्विक स्तर पर रोजगार की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि हर कोई यह लैंग्वेज सीखकर अच्छी इनकम कर सकते है। कुलपति ने बताया कि यूनिवर्सिटी से बॉयोटेक्नोलॉजी में बीटेक करने वाले एक विद्यार्थी को पाइथन लैंग्वेज का ज्ञान था, जिसके कारण उसने जर्मनी से एमटेक की व वर्तमान समय में आस्ट्रेलिया से पीएचडी कर रहा है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की वैश्विक स्तर पर प्लेसमेंट के लिए यूनिवर्सिटी ने पाठ्यक्रम के अतिरिक्त पाइथन लैंग्वेज सीखाने का निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि पाइथन लैंग्वेज को लेकर यूनिवर्सिटी के द्वारा भविष्य में निरंतर कार्यशाला का आयोजन करवाया जाएगा।
पाइथन लैंग्वेज और इसके फायदे
पाइथन एक ऑबजेक्ट ओरिएंटेड व हाई लेवल प्रोग्रामिंग भाषा है। इसके माध्यम से तेज गति से एप्लीकेशन का निर्माण किया जा सकता है। पाइथन लैंग्वेज की मदद से आप गेम, वेबसाइट व किसी तरह का सर्च इंजन भी बना सकते हैं। अधिकांश बड़ी कंपनियों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। इस लैंग्वेज का इस्तेमाल हम डाटा साइंस व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में कर सकते हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रोनिक्स एंड इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी चंडीगढ़ के डॉ. श्रवण सिंह व डॉ.अनिता बुद्धिराजा ने कहा कि अगर हमारा फ्रीज इंटेलिजेंट है तो वह यह भी संदेश दे देगा कि फ्रीज में कितना दूध है और कब मंगवाना है। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से हम कैंसर का जल्द पता लगा सकते है ताकि समय पर इलाज हो सके।