अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। राई औद्योगिक क्षेत्र में रविवार तड़के हुई आगजनी की घटना ने 19 साल पहले कच्चे क्वार्टर के दर्दनाक हादसे की याद दिला दी है। आगजनी की इस घटना को जिसने देखा वह सिहर उठा। बेशक 1999 में हुए हादसे में 48 लोगों की जान गई थी, लेकिन जिस तरह से राई औद्योगिक क्षेत्र की रीयल पेंट फैक्टरी से काला धुआं व आग की लपटे उठ रही थी। उस तरह कच्चे क्वार्टर के हादसे के दौरान आग लगने व लोगों के चीखने का मंजर था। कच्चे क्वार्टर के हादसे के बाद धुएं का जो गुबार आसमान में उठा था उसी तरह का गुबार ही रविवार सुबह राई क्षेत्र में देखने को मिला।
राई एचएसआईआईडीसी स्थित फैक्टरी में हुई आगजनी में तीन कर्मियों के जिंदा जलकर मौत होने के साथ ही दो के अभी तक लापता होने की घटना ने एक बार फिर से कच्चे क्वार्टर की घटना की याद दिला दी। कच्चे क्वार्टर में 7 नवंबर, 1999 में खौफनाक हादसा हुआ था। आगजनी की इस घटना में कई परिवारों के अरमान झुलस गए थे। शार्ट-सर्किट के कारण पटाखों में लगी आग में 48 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। राई में लगी आग को देखकर लोगों को वर्ष 1999 का वह मंजर फिर से याद आ गया। दीपावली से एक दिन पहले जिले के प्रमुख बाजार कच्चे क्वार्टर में पटाखों के स्टाक में आग लगने के बाद भगदड़ मच गई थी। इस भगदड़ में 48 लोगों की जलने व दम घुटने की वजह से मौत हो गई थी। वहीं सौ से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसमें एक ही दुकान के अंदर दर्जनों लोगों की जान गंवाई थी। कच्चे क्वार्टर व राई हादसे के चश्मदीद राई के रहने वाले राकेश ने बताया कि उस मंजर को कभी भूलाया ही नहीं जा सकता। बेशक कच्चे क्वार्टर का हादसा राई से बहुत बड़ा था, लेकिन रविवार को राई की आगजनी देखकर वह घटना फिर से जेहन में ताजा हो गई।